आगरा: उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आलू उत्पादक बेल्ट आगरा में किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। मंगलवार को ताजनगरी पहुंचे प्रदेश के उद्यान एवं कृषि विपणन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह को आलू किसानों ने अपनी व्यथा सुनाई। ‘आलू उत्पादक किसान सेवा समिति’ के बैनर तले एकजुट हुए किसानों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो क्षेत्र का किसान बर्बाद हो जाएगा।
गणित जो बिगाड़ रहा है किसान का बजट
किसान नेताओं ने आंकड़ों के जरिए अपनी पीड़ा बयां की। समिति के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीनारायण बघेल ने बताया कि
खाद, बीज, पानी और मेहनत मिलाकर 1 किलोग्राम आलू उगाने में करीब 12 रुपये खर्च हो रहे हैं। और मंडियों में किसानों को उत्तम श्रेणी के आलू के भी महज 6 से 7 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। किसान को हर किलो पर 5 से 6 रुपये का सीधा घाटा हो रहा है, जिससे पूंजी डूबना तय है।
कोल्ड स्टोरेज की ‘मनमानी’ पर लगाम की मांग
किसानों ने गंभीर आरोप लगाया कि कोल्ड स्टोरेज मालिक भंडारण (Storage) की दरें खुद तय कर रहे हैं, जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। ज्ञापन में मांग की गई कि
दरों के नियंत्रण के लिए भंडारण शुल्क तय करने का अधिकार सरकार अपने हाथ में ले। सरकारी सब्सिडी या छूट की राशि बिचौलियों के बजाय सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाए।
प्रोसेसिंग यूनिट और बेहतर ट्रांसपोर्टेशन की दरकार
किसानों ने दूरगामी समाधान के तौर पर आगरा मंडल में आलू प्रसंस्करण इकाइयां (Processing Units) स्थापित करने की मांग की। उनका कहना है कि अगर आलू से चिप्स, पाउडर और अन्य उत्पाद यहीं बनने लगें, तो किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही, आगरा के आलू को कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंचाने के लिए विशेष रेल और हवाई परिवहन की सुविधा देने का भी आग्रह किया गया।
”आत्महत्या को मजबूर न करें”
किसान नेता मोहन सिंह चाहर और वीरेंद्र सिंह परिहार ने कहा कि कई जगहों पर किसान अपनी फसल सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि सरकार ने समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद केंद्रों पर ठोस फैसला नहीं लिया, तो किसान आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकता है।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से कल्लू यादव सहित आगरा मंडल के दर्जनों प्रभावित किसान मौजूद रहे।
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