वाराणसी। प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इन आरोपों को ‘गौ-सेवा’ के संकल्प को रोकने की एक गहरी साजिश करार दिया। शंकराचार्य ने न केवल शिकायतकर्ता की साख पर सवाल उठाए, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर भी सीधा निशाना साधा।
”मैं अपना मुकदमा वापस नहीं करवाऊंगा”
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, “न्यायालय में जो बाधा आ रही है, उसे हम फेस करेंगे। हम योगी आदित्यनाथ थोड़े ही हैं जो अपना मुकदमा हटवा लेंगे। हमें इसकी जरूरत नहीं है। अगर हम पर आक्षेप है, तो हम एक आम नागरिक की तरह उसका सामना करेंगे। हमें अपनी न्यायपालिका और अपनी सच्चाई पर पूरा भरोसा है।”
शिकायतकर्ता को बताया उगाही करने वाला ‘हिस्ट्रीशीटर’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी खुद एक हिस्ट्रीशीटर है, जिसका काम फर्जी मुकदमे लगाकर उगाही करना है। उन्होंने कहा, “आप देखिए कि यह आरोप कहाँ से आ रहा है जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य की ओर से। उनका बल (समर्थन) कहाँ है, यह सबको पता है। यह सब गौमाता के लिए उठ रही हमारी आवाज को दबाने का एक कुत्सित प्रयास है।”
कोर्ट से की त्वरित जांच की मांग
शंकराचार्य ने कहा कि वे इस ‘फर्जी’ केस की जांच का स्वागत करते हैं। उन्होंने अदालत से अपील की कि इस मामले में त्वरित गति से कार्रवाई की जाए ताकि फर्जीवाड़ा जल्द से जल्द सिद्ध हो सके और षड्यंत्रकारियों का चेहरा बेनकाब हो।
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