लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा पेश की। इसमें राज्य की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का ब्यौरा दिया गया। सरकार का दावा है कि पिछले आठ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ा है और ग्रामीण विकास पर खर्च में खास बढ़ोतरी हुई है।
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक 2017-18 में ग्राम विकास पर 10,508 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 20,081 करोड़ रुपये हो गए। इस अवधि में ग्रामीण विकास व्यय में औसतन 8.43 फीसदी सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
रोजगार सृजन में बढ़त
मानव दिवस सृजन के मामले में प्रदेश ने बढ़त बनाई है। 2017-18 के 1814.34 लाख मानव दिवसों के मुकाबले 2024-25 में यह आंकड़ा 3363.97 लाख पहुंच गया, जो 85.41 फीसदी अधिक है। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक 1805 लाख से ज्यादा मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं।
ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए वीबी-जी राम जी योजना के तहत आजीविका, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य कराए गए। इस योजना में 266 तरह के सामुदायिक और व्यक्तिगत कार्य शामिल हैं।
तकनीक से निगरानी और पारदर्शिता
बुंदेलखंड में जल संकट से निपटने के लिए ललितपुर के बिरधा ब्लॉक में शहजाद नदी के 1500 मीटर हिस्से का पुनरुद्धार किया गया, जिससे 9859 मानव दिवस सृजित हुए और भूजल स्तर को लाभ मिला। कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए ई-एमबी मॉड्यूल, जियो टैगिंग, आधार आधारित भुगतान, मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
2024-25 में 65.26 लाख परिवारों के 75.83 लाख श्रमिकों को काम मिला और 6.16 लाख परिवारों को पूरे 100 दिन का रोजगार दिया गया। 2025-26 में अक्तूबर तक 47 लाख से अधिक परिवारों को काम मिला। परिवारों को रोजगार देने में यूपी देश में दूसरे स्थान पर है।
पौधरोपण और सामुदायिक परिसंपत्तियां
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 2024-25 में 13.54 करोड़ और 2025-26 में 13.23 करोड़ पौधे लगाए गए। नवंबर 2025 तक 19 हजार से ज्यादा अमृत सरोवरों का निर्माण या पुनरुद्धार हुआ। इसी अवधि में 3550 खेल मैदान और 1706 आंगनबाड़ी केंद्र भी बनाए गए।
महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी
योजना में महिलाओं की भागीदारी 2018-19 के 35 फीसदी से बढ़कर 2024-25 में 42 फीसदी हो गई। सामाजिक लेखा परीक्षा के तहत 2024-25 में 55,991 और 2025-26 में दिसंबर तक 51,648 ग्राम पंचायतों का ऑडिट हुआ।
स्कूलों का बड़ा नेटवर्क
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रदेश में 2.62 लाख से ज्यादा विद्यालयों का नेटवर्क तैयार किया गया है। इनमें प्राथमिक से लेकर इंटर कॉलेज स्तर तक के स्कूल शामिल हैं। पीएमश्री योजना में 1722 स्कूलों को हरित विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
साक्षरता में सुधार
2017-18 के मुकाबले 2023-24 तक पुरुष साक्षरता दर 80.6 से बढ़कर 86 फीसदी और महिला साक्षरता दर 62.9 से बढ़कर 70.4 फीसदी हो गई। नामांकन और बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार का दावा किया गया है।
शिक्षा पर बढ़ा खर्च
प्राथमिक शिक्षा पर खर्च 2016-17 के 32.91 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82.34 हजार करोड़ रुपये हो गया। समग्र शिक्षा अभियान के तहत भी बजट बढ़ा है और हजारों स्कूलों में लर्निंग-बाई-डूइंग कार्यक्रम चल रहे हैं।
छात्रों के लिए सुविधाएं
कक्षा 1 से 8 तक के 1.47 करोड़ बच्चों को मुफ्त किताबें दी गईं। यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे और स्टेशनरी के लिए प्रति छात्र 1200 रुपये डीबीटी से दिए जा रहे हैं। हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं और नई लैब भी बनाई जा रही हैं।
बालिका शिक्षा पर जोर
746 कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में 87,700 छात्राएं पढ़ रही हैं। विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए क्यूरियोसिटी प्रोग्राम चल रहे हैं। आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत अब तक 10.22 लाख से अधिक बालिकाओं को प्रशिक्षित किया गया।
समावेशी शिक्षा के प्रयास
दिव्यांग बच्चों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए समर्थ पोर्टल बनाया गया है। हजारों दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल और बड़े अक्षरों वाली किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण भी दिए गए हैं।
नामांकन और ठहराव में सुधार
यूडीआईएसई+ के आंकड़ों के अनुसार उच्च प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन दर 75.3 से बढ़कर 83.9 फीसदी हुई। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य होने का दावा है, जबकि उच्च प्राथमिक में यह 3 फीसदी रह गई। रिटेंशन दर भी 86.9 फीसदी तक पहुंची।
माध्यमिक और उच्च शिक्षा का विस्तार
प्रदेश में 29,532 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी से निगरानी की व्यवस्था की गई। विज्ञान प्रयोगशालाओं और आईसीटी लैब का विस्तार हो रहा है।
महाविद्यालयों की संख्या बढ़कर 8030 हो गई है। प्रदेश में 38 राज्य और 52 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। शोध और नवाचार के लिए अलग बजट प्रावधान किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
विश्वविद्यालयों ने 289 अंतरराष्ट्रीय एमओयू किए हैं, जिनसे हजारों छात्रों और शिक्षकों को लाभ मिला है।
मान्यता और रैंकिंग में सुधार
नैक A++ श्रेणी के विश्वविद्यालयों की संख्या अब 6 हो गई है। एक साल में नैक प्रत्यायित संस्थानों की संख्या 95 से बढ़कर 155 हुई। क्यूएस रैंकिंग में भी तीन विश्वविद्यालय शामिल हुए हैं।
तकनीकी शिक्षा पर फोकस
प्रदेश में 184 राजकीय और अनुदानित पॉलीटेक्निक संचालित हैं। महिला पॉलीटेक्निक की संख्या 21 है। आईटीआई में ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नए ट्रेड शुरू किए गए हैं और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कलाम अभ्युदय योजना चलाई जा रही है।
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