
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि इस डील से किसानों की आय बढ़ेगी, जबकि विपक्ष इसे संसद में चर्चा के लिए लाने की मांग कर रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते में किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी बाजार भारतीय किसानों को बेहतर दाम देंगे, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। उनके मुताबिक, भारत पहले ही करीब 55 अरब डॉलर के कृषि और मत्स्य उत्पादों का निर्यात कर रहा है और नई डील से इसे और बल मिलेगा।
गोयल ने यह भी कहा कि दो पन्नों के दस्तावेज में सभी पहलुओं को समेटा नहीं जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक आयात का आकार 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे अमेरिकी बाजार में मांग बढ़ेगी और भारतीय निर्यातकों को अवसर मिलेंगे। यह बयान उनकी उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया, जिसमें उन्होंने अंतरिम व्यापार समझौते के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी थी।
मंत्री ने बताया कि कुछ श्रेणियों में शून्य शुल्क और टैरिफ कटौती जैसे प्रावधान शामिल हैं। उनका दावा है कि इससे निर्यातकों, किसानों और एमएसएमई सेक्टर को फायदा होगा और भारत की वैश्विक बाजार तक पहुंच मजबूत होगी।
उधर विपक्ष ने इस समझौते पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने डील को देश के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे “धोखे वाला” करार दिया। उनका आरोप है कि सरकार ने राष्ट्रीय नीति से समझौता किया है। उन्होंने पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों में यह समझौता किया गया।
चतुर्वेदी ने सरकार से मांग की कि वह इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा करे। उनके अनुसार, यदि समझौता देश के लिए फायदेमंद है तो सरकार को सदन में पूरी जानकारी रखनी चाहिए और सवालों के जवाब देने चाहिए।
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