DEI आगरा में ‘गर्भ संस्कार’ पर मंथन: चरित्र निर्माण की पहली प्रयोगशाला है गर्भावस्था— डॉ. बी. एस. जोहरी

PRESS RELEASE

आगरा: दयालबाग एजुकेशन इंस्टीट्यूट (DEI) के अंतर्गत संचालित DEI होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल द्वारा ‘गर्भ संस्कार’ विषय पर एक उच्च स्तरीय शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान मातृ स्वास्थ्य, मानसिक सुदृढ़ता और सकारात्मक संस्कारों के जरिए आने वाली पीढ़ी के सर्वांगीण विकास पर प्रकाश डालना था।

चरित्र निर्माण की प्रथम प्रयोगशाला

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात विद्वान डॉ. बी. एस. जोहरी ने वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पक्षों को साझा करते हुए कहा कि गर्भावस्था महज एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण की पहली प्रयोगशाला है। इस अवसर पर उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक ‘बीमारियों को कहें ना’ का विमोचन भी किया गया।

परंपरा और आधुनिकता का समन्वय

DEI के निदेशक प्रो. सी. पट्वर्धन ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक विज्ञान और भारतीय जीवन दर्शन का मेल ही एक सशक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकता है। वहीं, डॉ. एस. के. सत्संगी ने गर्भ संस्कार को समाज के नैतिक निर्माण की आधारशिला करार दिया।

जीवनशैली के रूप में गर्भ संस्कार

विशिष्ट वक्ता डॉ. गुरदेवी श्रीवास्तव ने बताया कि DEI में प्रचलित गर्भ संस्कार केवल एक विधा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है। उन्होंने इसके व्यावहारिक सिद्धांतों को बहुत ही सरल ढंग से विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के सामने रखा।

संगोष्ठी का कुशल संचालन डॉ. धनवर्षा झाडे ने किया, जबकि डॉ. प्रीति रस्तोगी (संयोजक), डॉ. दीप्ति शर्मा (महासचिव) और डॉ. अंकिता ओखरवाल (समन्वयक) ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. मनीष रस्तोगी सहित कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. आरती सांघी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

Dr. Bhanu Pratap Singh