कुष्ठ निवारण दिवस पर DGC अशोक चौबे एडवोकेट ने बच्चों को जीवन मूल्य सिखाया, पूरन डावर ने खुद को मोची बताकर माहौल भावुक बनाया

REGIONAL साहित्य

 

कुष्ठ निवारण दिवस पर DGC अशोक चौबे एडवोकेट की बच्चों को अनुपम सीख, पूरन डावर ने कहा, मुझ मोची का भी सत्कार हो रहा

कुष्ठ सेवा सदन में तिरस्कार से सत्कार पुस्तक का लोकार्पण

प्रसिद्ध कवि डॉक्टर सुषमा सिंह का जन्म दिवस भी मनाया

आगरा। कवि के रूप में निरंतर अपनी पहचान मजबूत कर रहे
जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक चौबे एडवोकेट ने कुष्ठ निवारण दिवस के अवसर पर बच्चों को ऐसी सीख दी, जो जीवन भर उनके साथ रहेगी। उन्होंने बच्चों से कहा कि हर सुबह नींद से उठते ही अपने हाथों का दर्शन करें और यह श्लोक बोलें—

कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती,
कर्मूलेतु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम्।

उन्होंने बच्चों से यह भी संकल्प करवाया कि वे प्रतिदिन माता-पिता की सेवा करेंगे।
अशोक चौबे एडवोकेट ने भावुक शब्दों में कहा कि स्कूल जाने से पहले माता-पिता के चरण स्पर्श करें, क्योंकि माता-पिता साक्षात ईश्वर होते हैं और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

गोष्ठी में वक्ताओं ने महात्मा गांधी को याद कर श्रद्धांजलि दी

यह अवसर कुष्ठ सेवा सदन, आगरा में
‘लैप्रोसी पेशेंट्स वेलफेयर सोसाइटी’ के तत्वावधान में राष्ट्रपिता
महात्मा गांधी के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित
कुष्ठ निवारण दिवस कार्यक्रम का था।
30 जनवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने गांधी जी के जीवन, सेवा और मानवता के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने के उनके संकल्प को दोहराया।

प्रसिद्ध कवि सुषमा सिंह का जन्मदिन भी मनाया गया

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध जूता निर्यातक एवं
फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के चेयरमैन
पूरन डावर ने की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी हर युग में प्रासंगिक रहेंगे। उन्होंने
लेप्रोसी पेशेंट्स वेलफेयर सोसाइटी के सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की और काव्यपाठ करने वाले कवियों की सारगर्भित समीक्षा भी की।

डॉक्टर सुषमा सिंह का जन्म दिवस मनाते अतिथि

‘तिरस्कार से सत्कार’ पुस्तक की भावना को आत्मसात करते हुए पूरन डावर ने भावुक होकर कहा—
“मैं विशुद्ध मोची हूं, जो कभी जूता गांठता था, आज उसी का यहां सत्कार हो रहा है।”
उन्होंने
डॉ. मधु भारद्वाज से कहा कि वे कभी खुद को अकेला न समझें, पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।

इसी अवसर पर आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य एवं प्रसिद्ध कवियत्री डॉ. सुषमा सिंह का जन्मदिवस भी आत्मीय वातावरण में मनाया गया। उन्हें उपहार स्वरूप कंगन भेंट किए गए। इस भावपूर्ण क्षण में
अशोक चौबे एडवोकेट ने सस्वर गीत गाया—
“तुम जियो हजारों साल”,
जिससे पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा और कार्यक्रम मानवीय संवेदनाओं की यादगार मिसाल बन गया।

उद्घाटन मंचासीन अतिथियों एवं अध्यक्ष आदि द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं उनके समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात दो मिनट का मौन रखकर गांधी जी को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर संगीतज्ञ प्रतिभा तलेगांवकर एवं शुभ्रा तलेगांवकर द्वारा श्रीराम धुन एवं वैष्णव भजन का गायन किया गया।

इस अवसर पर पुस्तिका ‘एक सफर तिरस्कार से सत्कार तक भाग-2’ का विमोचन किया गया। सोसाइटी की सचिव डॉ. मधु भारद्वाज ने बताया कि पुस्तिका में कुष्ठ रोग के साथ-साथ अन्य रोगों से सम्बन्धित वरिष्ठ चिकित्सकों के लेखों का समावेश है, जो कि पाठकों के लिए लाभप्रद सिद्ध होंगे।

डॉ. मधु भारद्वाज ने कहा कि यह बिल्डिंग 1861 की बनी हुई है, जिसमें कुष्ठ रोगियों को निःशुल्क रहने, खाने-पीने एवं दैनिक आवश्यक सामान की व्यवस्था शहर के दानदाताओं द्वारा की जाती है। यह बिल्डिंग 165 वर्ष पुरानी है, जिसमें यह सोसाइटी पिछले 49 वर्षों से कुष्ठ रोगियों के लिए सेवा कार्य कर रही है। कुष्ठ सेवा सदन कुष्ठ रोगियों के लिए घर जैसा है। साथ ही उन्होंने भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

सोसाइटी के उपाध्यक्ष डॉ. ए. एस. सचान ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय दिया। साथ ही सोसाइटी के अतीत की भी जानकारी दी और भविष्य में इसी प्रकार कुष्ठ रोगियों की सेवा करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य हम सबके सहयोग से ही संभव हो पाते हैं।

इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट असलम सलीमी को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान एवं सेवाभाव के लिए सम्मानित किया गया। असलम सलीमी ने कहा, लैप्रोसी पेशेन्ट्स वेलफेयर सोसाइटी द्वारा सम्मान पाकर मैं गौरवान्वित हूँ एवं सोसाइटी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

कार्यक्रम में लोपामुद्रा विद्या मन्दिर, जालमा परिसर, ताजगंज, आगरा के विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। मुख्य अतिथि अशोक चौबे ने कहा कि गाँधी जी ने हमें दीन-दुखियों की सेवा करना सिखाया। दीन-दुखियों की सेवा ही गाँधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। हमें माता-पिता की सेवा करनी चाहिए।

कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री पूरन डावर, चेयरमैन, फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद ने कहा कि गाँधी जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ एवं आगरावासियों से अपील करता हूँ कि कुष्ठ रोगियों की तन-मन-धन से सेवा करें। सह-अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. डी. वी. शर्मा, वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के आदर्शों पर चलकर पूर्व सचिव डॉ. वेद भारद्वाज द्वारा कुष्ठ रोगियों की जो सेवा की गई, वह अतुलनीय है। कुष्ठ रोगियों की सेवा करने की प्रेरणा मुझे उनसे ही मिली।

इस अवसर पर आयोजित विचार-गोष्ठी में डॉ. राजकमल, प्रो. उमापति दीक्षित, डॉ. डी. वी. शर्मा, सुनयन शर्मा, डॉ. महेश धाकड़, डॉ भानुपताप सिंह, श्रीकृष्ण आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

काव्य-गोष्ठी में डॉ. राजेन्द्र मिलन, डॉ. सुषमा सिंह, प्रभुदत्त उपाध्याय, डॉ. यशोयश, विजया तिवारी, उमाशंकर आचार्य आदि ने काव्य-पाठ किया।

इस अवसर पर वी. के. गुप्ता, राजीव सक्सेना, डॉ. भानुप्रताप सिंह, जी. एस. मनराल, रमन देव, डॉ. ममता अरोड़ा, डॉ. नेहा मिश्रा, इन्दिरा, भावना उपाध्याय, शशिरंजन, हर्ष आर्या, विक्रम गुप्ता, प्रो. आभा चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम आयोजित कराने में कु. गरिमा भारद्वाज, शिवशंकर बघेल, रामभरोसी एवं गुल मोहम्मद का विशेष सहयोग रहा। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर. सी. अग्रवाल द्वारा किया किया। कार्यक्रम का संचालन सचिव डॉ. मधु भारद्वाज ने किया।

संपादकीय | तिरस्कार से सत्कार तक : यही है सभ्य समाज की पहचान
कुष्ठ निवारण दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि समाज के आईने में झांकने का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बीमारी से ज़्यादा घातक वह सोच होती है, जो इंसान को इंसान से दूर कर देती है। आगरा के कुष्ठ सेवा सदन में आयोजित कार्यक्रम ने यही साबित किया कि जब संवेदना नेतृत्व करती है, तो उपेक्षा भी सम्मान में बदल जाती है।
जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक चौबे एडवोकेट द्वारा बच्चों को दी गई सीख केवल श्लोक या संस्कार की बात नहीं थी, वह भविष्य की नींव रखने जैसा क्षण था। माता-पिता को ईश्वर मानने की बात आज के भागते युग में क्रांतिकारी विचार है। यदि बच्चे सुबह हाथों का दर्शन नहीं भी करें, पर माता-पिता के चरणों का सम्मान करना सीख लें, तो समाज अपने आप स्वस्थ हो जाएगा।
कार्यक्रम में महात्मा गांधी का स्मरण यह संदेश देता है कि सेवा, करुणा और समानता कभी अप्रासंगिक नहीं होती। गांधी जी ने कुष्ठ रोगियों को केवल मरीज नहीं, बल्कि आत्मसम्मान से भरे नागरिक के रूप में देखा। आज जब हम उनकी बात करते हैं, तो असल परीक्षा यही है कि क्या हम उनके विचारों को जी भी रहे हैं या सिर्फ भाषणों में दोहरा रहे हैं।
सबसे भावुक क्षण तब आया, जब पूरन डावर ने कहा— “मैं विशुद्ध मोची हूं, आज उसी का सत्कार हो रहा है।” यह वाक्य किसी भाषण से बड़ा था। यह उस सामाजिक बदलाव की गवाही है, जहाँ पेशा नहीं, व्यक्ति का सम्मान होता है। यही ‘तिरस्कार से सत्कार’ की असली परिभाषा है।
डॉ. सुषमा सिंह का जन्मदिन मनाया जाना भी इस कार्यक्रम को मानवीय ऊँचाई देता है। साहित्य, सेवा और संवेदना जब एक मंच पर मिलते हैं, तब समाज केवल आगे नहीं बढ़ता, बल्कि भीतर से बेहतर बनता है।
आज ज़रूरत है कि ऐसे आयोजन औपचारिकता न बनें, बल्कि आंदोलन बनें। कुष्ठ निवारण केवल दवा से नहीं होगा, वह सोच बदलने से होगा। और सोच तभी बदलती है, जब समाज का हर वर्ग साथ खड़ा हो।
यही संदेश आगरा के इस आयोजन ने दिया—
इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसका दिल होता है, उसकी बीमारी नहीं।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

 

Dr. Bhanu Pratap Singh