मुंबई (अनिल बेदाग)। मुंबई में आयोजित द शताब्दी समिट: सेंटेनरी कॉन्फ्रेंस केवल एक औपचारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि यह उस सौ साल की पेशेवर विरासत का उत्सव बना, जिसने भारत के टैक्स, अकाउंटिंग और लीगल इकोसिस्टम को दिशा दी है। चैंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स (सीटीसी) ने अपनी 100वीं वर्षगांठ को जिस गरिमा, वैचारिक गहराई और भविष्यदृष्टि के साथ मनाया, उसने इस आयोजन को एक यादगार पेशेवर पड़ाव में बदल दिया।
देश के प्रमुख फाइनेंस, टैक्स और लीगल विशेषज्ञों की मौजूदगी में यह समिट भारत के बदलते आर्थिक और नियामकीय परिदृश्य पर गंभीर मंथन का मंच बनी। यहां चर्चा केवल कानूनों और आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अनुभव, नैतिकता, जवाबदेही और प्रोफेशनल जिम्मेदारी जैसे मूल्यों पर केंद्रित रही, वही मूल्य जिन पर सीटीसी की एक सदी लंबी यात्रा टिकी रही है।
इंडसइंड बैंक के चेयरमैन डिज़िग्नेट (नॉन-एग्जीक्यूटिव) अरिजीत बसु ने अपने कीनोट संबोधन में भारत की आर्थिक प्रगति को व्यापक नजरिए से रखा। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा केवल तेज़ रफ्तार ग्रोथ की कहानी नहीं है। टिकाऊ और संतुलित विकास के लिए नैतिक नेतृत्व, संस्थागत मजबूती और दीर्घकालिक सोच आवश्यक है, और इस संतुलन को साधने में प्रोफेशनल्स की भूमिका निर्णायक होती है।
सीटीसी के अध्यक्ष सीए जयंत गोखले ने कहा कि शताब्दी समिट का उद्देश्य सिर्फ अतीत की उपलब्धियों को याद करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए खुद को तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि सौ साल की विरासत यह सिखाती है कि प्रोफेशनल प्रैक्टिस को समय के साथ लगातार विकसित होना चाहिए। आज गवर्नेंस, जवाबदेही और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें प्रोफेशन का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी हैं।
शताब्दी वर्ष समिति के चेयरमैन सीए विपुल चोकसी ने समिट की अवधारणा को सीटीसी की सोच से जोड़ते हुए कहा कि इस आयोजन को उभरते ट्रेंड्स और मौजूदा चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। हर सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को सोचने, सीखने और आगे की दिशा तय करने के लिए प्रेरित करना रहा।
कीनोट सत्रों से लेकर डॉ. निरंजन हीरानंदानी के साथ हुई फायरसाइड चैट तक, हर चर्चा ने यह साफ किया कि आज के दौर में प्रोफेशनल उत्कृष्टता मल्टी-डिसिप्लिनरी सोच और नवाचार के बिना संभव नहीं है।
सीटीसी की वाइस प्रेसिडेंट सीए नेहा गाडा ने संगठन की सीखने की संस्कृति को उसकी असली पहचान बताया। उन्होंने कहा कि सीटीसी हमेशा अनुभव और नई ऊर्जा का संगम रहा है। शताब्दी समिट ने यह साबित किया कि संगठन अपनी विरासत का सम्मान करते हुए तकनीक और नए प्रोफेशनल मॉडल्स को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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