मथुरा: माघ मेले में शंकराचार्य के गंगा स्नान को लेकर हुए विवाद ने अब राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने रक्त से पत्र भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि संतों का अपमान सनातनी समाज स्वीकार नहीं करेगा।
“शंकराचार्य का अपमान गौ-हत्या जैसा पाप”
दिनेश फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में लिखा कि शंकराचार्य हिंदुओं के लिए सर्वोच्च और भगवान स्वरूप हैं। स्वयं प्रधानमंत्री भी उनके चरण स्पर्श करते हैं। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शंकराचार्य जैसे पूज्य संत को गंगा स्नान से रोकना गौ-हत्या के बराबर पाप है। महाराज ने कहा कि प्रशासन के इस रवैये से सोशल मीडिया और समाज में भारी नाराजगी है।
अधिकारियों की माफी की मांग
महाराज ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि वे स्वयं एक सनातनी महंत हैं और इस गौरवमयी परंपरा के रक्षक हैं। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों ने शंकराचार्य और अन्य संतों का अपमान किया है, वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने चेतावनी दी कि संतों के बीच चल रहे इस विवाद का लाभ विपक्षी राजनीतिक दल उठा रहे हैं, जो सनातन धर्म के लिए ठीक नहीं है।
आक्रोश को शांत करने की अपील
दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री से इस प्रकरण में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अधिकारियों को सख्त निर्देश देने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी संत के साथ ऐसा व्यवहार न हो और वर्तमान में फैली नाराजगी को अधिकारियों की माफी के जरिए शांत किया जा सके।
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