बरेली में गरजे डॉ. तोगड़िया: “बांग्लादेशी हिंदुओं की हालत 90 के दशक के कश्मीर जैसी”, राम मंदिर को बताया करोड़ों हिंदुओं के संघर्ष की जीत

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बरेली। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि बांग्लादेश में बीते वर्षों से हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने इसकी तुलना 1990 के दशक में कश्मीर घाटी की परिस्थितियों से करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब समाज संगठित नहीं होता, तो ऐसी स्थितियां जन्म लेती हैं।

रविवार को बरेली के राजेंद्रनगर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा, किसान और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से अपनी बात रखी।

डॉ. तोगड़िया ने कहा कि राम मंदिर निर्माण करोड़ों हिंदुओं के योगदान से संभव हुआ है और यह किसी एक व्यक्ति या संगठन की देन नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत कभी विश्व का सबसे समृद्ध और शिक्षा का केंद्र रहा है, जिसने दुनिया को शून्य का ज्ञान दिया। आज आवश्यकता है कि देश फिर से उसी दिशा में आगे बढ़े।

शिक्षा और किसानों के मुद्दे पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सस्ती और सुलभ शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है तथा युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए। किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेत और फसल किसान की है, तो फिर कर्ज का बोझ क्यों? उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

सामाजिक एकजुटता का आह्वान

डॉ. तोगड़िया ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग आज भी भूखे सोने को मजबूर हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि सामाजिक और धार्मिक एकजुटता के लिए हर गांव में मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के अन्य देशों से सीख लेकर समाज को संगठित करना होगा, ताकि सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

दिलाए गए संकल्प

कार्यक्रम के दौरान डॉ. तोगड़िया ने उपस्थित लोगों को कई संकल्प दिलाए। इनमें समाज की सुरक्षा और समृद्धि, सस्ती शिक्षा, किसानों को फसल का उचित मूल्य, कोई भी हिंदू भूखा न रहे, स्थानीय दुकानों से खरीदारी को बढ़ावा देना और देशहित में कठोर नीतियों की मांग शामिल रही।

उन्होंने कहा कि यह संकल्प किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य से जुड़ा हुआ है और इसे जनआंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए।

Dr. Bhanu Pratap Singh