आगरा /पिनाहट। उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान के मध्य होकर गुजरी साफ सुधरी चंबल नदी में चंबल सेंचुरी घोषित होने के बाद विश्व विलुप्तप्राय मगरमच्छ और घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। वन विभाग और वाइल्डलाइफ द्वारा संरक्षण किया जा रहा है।
चंबल नदी में निम्न प्रकार के जलीय जीव पाए जाते हैं। और लगातार इनका कुनबा बढ़ता जा रहा है। चंबल नदी में मगरमच्छ और घड़ियालों का नेस्टिंग सीजन होने के चलते वह अपने एंड बालू में दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ रविवार को सुबह मध्य प्रदेश की सीमा में क्योरी और रायपुर घाट के बीच चंबल नदी के एक टापू पर एक विशाल नर मगरमच्छ मृत अवस्था में पड़ा हुआ दिखाई देने से हड़कंप मच गया। इसके बाद सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सीमा के वन विभाग द्वारा मौके पर दौड़ लगा दी और मोटर बोट द्वारा मृत अवस्था में पड़े मगरमच्छ को नदी किनारे लाया गया।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मृत अवस्था में मिले मगरमच्छ के मामले को लेकर सीमा विवाद उलझ गया। जिसे लेकर उत्तर प्रदेश के आगरा और मध्य प्रदेश के मुरैना क्षेत्र का वन विभाग शाम तक उलझा मगरमच्छ कैसे मारा इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं हो पाई है।
देखा जाए तो नेस्टिंग के समय मगरमच्छ उग्र हो जाते हैं और आपस में भी भिड़ जाते हैं। या फिर चंबल के बीच बने टापूओं पर नुकीली जगह होने पर टकरा के कई जगह फटकर भी जलीय जीव मर जाते हैं। ऐसी भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता आखिर मगरमच्छ कैसे मारा इसकी जानकारी तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी।
वन विभाग द्वारा मगरमच्छ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वन दरोगा राहुल जादौन का कहना है। कि चम्बल के मध्य में मृत मगरमच्छ मिला था। शाम अधिक होने के बाद पोस्टमार्डम की कार्यवाही सोमबार को होगी।मगरमच्छ की मौत प्राकृतिक हुई हे और स्थिति पोस्टमार्डम के बाद स्प्ष्ट होगी।
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