आगरा: अयोध्या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य परमहंस ने शनिवार को ताजमहल का भ्रमण किया और वहां फोटो भी खिंचाए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा, “भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रमुख ने मुझसे माफी मांगी थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि अगर आपके धर्मदंड में कुछ नहीं है तो आप इसे ताजमहल में ले जा सकते हैं। मेरा मानना है अगर मुस्लिम टोपी पहनकर ताजमहल के अंदर जा सकता है तो हम धर्मदंड लेकर क्यों नहीं जा सकते हैं।”
गौरतलब है कि आचार्य परमहंस वर्ष 2022 में अयोध्या से आगरा आए थे। वे अपने शिष्य के साथ ताजमहल में जा रहे थे। उनके पास टिकट भी था, लेकिन सीआईएसएफ के जवानों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया था। वे भगवा कपड़े पहने थे। उनके हाथ में धर्मदण्ड था। इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया था।
शनिवार को मीडिया के समक्ष आचार्य परमहंस ने कहा कि वह शाहजहां का नाम भी नहीं लेना चाहते हैं क्योंकि उसने अपनी ही बेटी से शादी की थी। उसके साथ संबंध बनाया था। वह एक रेपिस्ट था।
परमहंस ने कहा, “ताजमहल तेजोमहल है। ये यह प्राचीन शिवालय है। इसलिए ही यह विश्व का सातवां अजूबा है। वह आज भगवान शिव के मंदिर के दर्शन करने ही यहां पहुंचे हैं। इस मौके पर वह शाहजहां का नाम लेना नहीं चाहते हैं। उसका नाम लेना कलंक है।”
उन्होंने लव जिहाद पर कहा कि हिंदू लड़की लव जेहाद में फंसती है तो जीते जी नरक में चली जाती है। वहीं अगर मुस्लिम लड़की घर वापसी करती है, सनातन धर्म में आती है तो जीते जी स्वर्ग मिलता है। हमारे सनातन में तीन चार बीवी का चक्कर नहीं है। 72 हूरें नहीं हैं। हमारे सनातन में महिला को देवी का दर्जा दिया जाता है।
उन्होंने कहा, “मैं यहां कोई विवाद करने नहीं आया हूं। जैसे सब जा रहे हैं, वैसे ही हम जा रहे हैं। हम शांति से जाएंगे और शिव मंदिर के दर्शन करके आ जाएंगे। एएसआई चीफ ने भी सहमति दे दी। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आपके धर्मदंड में लोहा नहीं है तो आप इसे लेकर अंदर जा सकते हैं।”
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