Mathura, Uttar Pradesh, India. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 315 बोर का तमंचा चुनौती बन सकता है। पुलिस धड़ाधड़ आपराधिक तत्वों की गिरफ्तारी कर रही है और उनके पास 135 बोर के तमंचा और कारतूस मिल रहे हैं। यह सवाल उठ रहा है कि 315 बोर का तमंचा चुनाव प्रक्रिया के दौरान पुलिस के लिए चुनौती बन सकता है।
अपराधी अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए 135 बोर के असलाह का ही उपयोग कर रहे हैं।
2016 में हुए प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाले जवाहर बाग कांड ने भी 315 बोर का तमंचा खूब उछला था। जवाहर बाग में पुलिस ने जब सर्च अभियान चलाया तो सबकी आंखें फटी रह गईं। पुलिस को वहां से सौ से अधिक असलहे मिले। यहां से पुलिस को 315 बोर के 45 तमंचा, 12 बोर के दो तमंचा, 315 बोर की सात रायफल, 12 बोर की चार रायफल, चार देशी रायफल, 12 बोर के 80 कारतूस, 315 बोर के 99 कारतूस तथा 32 बोर के पांच कारतूस मिले थे।
करीब एक महीने पहले डैम्पियर नगर में वृंदावन की पूर्व सभासद मीरा ठाकुर को 135 बोर के तमंचे से ही गोली मारी गई थी। बरसाना पुलिस ने 12 मार्च को चोरी की ईको कार के साथ जिस आरोपी को गिरफ्तार किया है, उसके पास से भी पुलिस को 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ है। मार्च के महीने में ही 2018 में पुलिस ने बरसाना थाना क्षेत्र के एक गांव में छापेमारी कर अवैध रूप से हथियार बनाने वाली एक फैक्ट्री पकड़ी। पुलिस को जांच के दौरान 315 बोर की एक राइफल, एक देसी तमंचा और 15 कारतूस, 12 बोर की दो देसी बंदूक, 10 कारतूस और देसी शराब के 2200 पाउच मिले।
कान्हा की नगरी में हर दूसरे व्यक्ति के हाथ में 315 बोर का तमंचा होता है। इसके बाद भी पुलिस यह नहीं जानती कि ये तमंचा कहां से आ रहे हैं। किसी बडी तमंचा फैक्टरी का पुलिस ने वर्षों से भंडाफोड़ नहीं किया है। यहां तक कि कोई खेप भी नहीं पकड़ी है। 315 बोर का तमंचा कहां से आ रहे हैं, कहां बन रहे हैं और इनकी सप्लाई कैसे हो रही, पुलिस ने कभी खुलासा नहीं किया है। पुलिस आपराधिक घटना के बाद या अपराधी की गिरफ्तारी के बाद 315 बोर का तमंचा बरामद जरूर दिखाती है, लेकिन ये तमंचा उस आरोपी तक पहुंचा कैसे, कहां बना, यह कभी नहीं बताती है। यहां तक कि पुलिस के साथ होने वाली मुठभेड में भी अपराधी 315 बोर के तमंचे का ही उपयोग करते हैं।
पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। जल्द ही जिला प्रशासन शस्त्र लाइसेंस धारकों को नोटिस जारी करने जा रहा है। हलका इंचार्ज और थाना इंचार्ज लगातार ऐसे लोगों के संपर्क में हैं जिनके पास लाइसेंसी असलाह हैं। वहीं गावों में पुस्तैनी और चुनावी रंजिशों के मामलों को भी खंगाला जा रहा है, जिससे किसी भी संभावित टकराव को टाला जा सके। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के ऐसे संभावित प्रत्याशी जिनके पास लाइसेंसी असलाह हैं, उन्हें सबसे पहले जमा कराया जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया है कि जल्द से जल्द जिले में जितने भी लाइसेंसी हैं उनके हथियार को शस्त्र की दुकानों या फिर थानों में जमा करवाया जाए। साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी भी गठित की जाए, जिसके माध्यम से खुद के पास हथियार को रखने की छूट मिल सकती है। जल्द ही लाइसेंसियों को नोटिस भेजे जाएंगे। हथियार न जमा करने वाले लाइसेंसियों पर कार्यवाही भी की जाएगी।
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