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Agra, Uttar Pradesh, Bharat, India. ताज महोत्सव 2023 के बारे में अनेक कहानियां प्रकाश में आ रही हैं। ताज महोत्सव 2023 में 27673148 रुपये खर्च हुए खर्च हुए। टिकट बिक्री और चंदा से 3,34,58,327 रुपये मिले। क्या यह मामूली राशि है? इसके बाद भी स्थानीय कलाकारों को भुगतान में हाथ खींच लिए जाते हैं। कुछ चुनिंदा लोगों को ही अपेक्षाकृत ठीक धनराशि दी जाती है लेकिन वह भी आशा के अनुरूप नहीं है।
टीवी रिएलिटी शो एक्स फैक्टर फेम करतार सिंह ने सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी। उपलब्ध कराई गई सूचनाओं से पता चलता है कि किस तरह से धनराशि ठिकाने लगाई गई।
यहां देखें कितनी आय हुई और कितना खर्च हुआ

एक्स फैक्टर फेम करतार सिंह की टिप्पणी
आगरा में क्षेत्रीय प्रतिभाओं की कला को नए क्षितिज गढ़ने के लिए शरद महोत्सव का शुभारंभ किया गया था। वही महोत्सव ताज महत्सव के नाम से चरमोत्कर्ष पर है। यह अब अपने उद्देश्य से भटककर कुछ धनकुबेरों और चापलूसों को मोहरा बन चुका है।
शरद महोत्सव शुरू करने में तत्कालीन नगर महापालिका आगरा के नगर आयुक्त श्री विनोद दीक्षित, महापौर रामबाबू वर्मा एडवोकेट और अमर उजाला के संस्थापक- प्रखर संपादक डोरीलाल अग्रवाल की विशेष भूमिका थी। शरद महोत्सव आगरा शहर की समस्त सामाजिक संस्थाओं के साथ विचार विमर्श कर कार्यान्वित किया जाता था। कोई एंट्री फीस भी नहीं होती थी। अब सब बदल गया।
यह अब ताज महोत्सव के रूप में अपने क्षेत्रीय कवि, रंगकर्मी एवं संगीतज्ञों को दरकिनार कर धन बटोरने में लग गया है। आगरा छोड़कर उत्तर प्रदेश के किसी भी महोत्सव में प्रवेश शुल्क नहीं है। अगर प्रवेश शुल्क से ही आय करनी है तो फ्री पास देना बंद किया जाए।
नामी-गिरामी स्थापित कलाकारों को आमंत्रित कर कमाई करने की इच्छा से प्रशासन ने ताजनगरी की स्वाभिमानी प्रतिभाओं से किनारा कर लिया है। बहरहाल कुछ चाटुकारिता में परिपक्व तथाकथित कलाकार अवश्य लाभान्वित हो रहे हैं। ताज महोत्सव एक कहावत शत प्रतिशत चरितार्थ कर रहा है- “घर का जोगी जोगना, आन गांव का सिद्ध।”
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