25 साल बाद भी फाइलों में दबा आगरा दीवानी लाठीचार्ज कांड, आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने मांगी जांच आयोग की रिपोर्ट

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अधिवक्ताओं पर 26 सितंबर 2001 को हुआ था लाठीचार्ज, जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग ने की थी जांच; अब गृह विभाग से मांगी गई रिपोर्ट और कार्रवाई की पूरी पत्रावली

आगरा दीवानी न्यायालय परिसर में 26 सितंबर 2001 को अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज की घटना को 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस घटना की जांच के लिए गठित जस्टिस गिरधर मालवीय जांच आयोग की रिपोर्ट और उसके आधार पर हुई कार्रवाई आज भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई है। घटना की 25वीं बरसी के मौके पर एक बार फिर यह सवाल सामने है कि आखिर आयोग की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले थे और दोषी पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध शासन ने क्या कार्रवाई की?

इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग में RTI दाखिल की गई थी। गृह विभाग ने इस RTI को उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय को स्थानांतरित कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस मुख्यालय की ओर से मांगी गई सूचनाओं का क्या जवाब दिया जाता है।

क्या हुआ था 26 सितंबर 2001 को?

उच्च न्यायालय की खंडपीठ आगरा में स्थापित किए जाने की मांग को लेकर अधिवक्ता आंदोलनरत थे। 25 सितंबर 2001 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अधिवक्ता मथुरा में आयोजित कार्यक्रम में भी पहुंचे थे। इसके अगले दिन, 26 सितंबर को आगरा दीवानी परिसर में अधिवक्ताओं की बैठक के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज हुआ। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में अधिवक्ता घायल हुए थे। न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चोटें आई थीं। घटना के बाद अधिवक्ताओं में व्यापक आक्रोश हुआ और लंबे समय तक विरोध तथा न्यायिक कार्य से विरत रहने की स्थिति बनी रही। घटना की जांच के लिए बाद में जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग का गठन किया गया। प्रकाशित रिपोर्टों में यह उल्लेख मिलता रहा है कि आयोग ने तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर प्रतिकूल निष्कर्ष दिए और कार्रवाई की संस्तुति की थी।

25 साल बाद RTI में पूछे गए पांच बड़े सवाल

नरेश पारस द्वारा इस RTI में केवल आयोग की रिपोर्ट मांगने तक बात सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि रिपोर्ट के बाद शासन ने क्या किया, इसका पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है।

1. आयोग की पूरी रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति

26 सितंबर 2001 की घटना की जांच के लिए गठित जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग द्वारा शासन को भेजी गई संपूर्ण जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगी गई है।

2. Action Taken Report और पूरी पत्रावली

आयोग की रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग द्वारा तैयार की गई Action Taken Report, दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई तथा संबंधित नोटशीट और पूरी पत्रावली की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं।

3. विधानसभा के पटल पर रिपोर्ट रखने का रिकॉर्ड

जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 और 4 के अनुपालन में आयोग की रिपोर्ट को राज्य विधानसभा के पटल पर रखे जाने तथा उस पर प्रस्तुत कार्रवाई के ज्ञापन से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड भी मांगा गया है।

4. दोषी अधिकारियों की सूची और कार्रवाई का विवरण

आयोग की रिपोर्ट में जिन पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दोषी चिन्हित किया गया, उनकी नामवार सूची और उनके विरुद्ध की गई दंडात्मक कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।

5. 25 वर्ष बाद भी लंबित प्रक्रिया की स्थिति

रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध संचालित विभागीय जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति भी RTI में पूछी गई है।

सवाल सिर्फ लाठीचार्ज का नहीं, सरकारी जवाबदेही का भी

नरेश पारस ने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि किसी न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, तो उसके बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई हुई? यदि कार्रवाई हुई तो उसका रिकॉर्ड क्या है और यदि नहीं हुई तो उसके कारण क्या रहे? आगरा में अधिवक्ता हर वर्ष 26 सितंबर को इस घटना की याद में काला दिवस मनाते रहे हैं। 2022 में भी अधिवक्ताओं ने 21 वर्ष पुरानी घटना को लेकर प्रदर्शन करते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। 2025 में भी घटना की जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक न होने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग सामने आई थी। अब 25 वर्ष पूरे होने पर RTI के जरिए मांगी गई जानकारी इस पुराने मामले को एक बार फिर रिकॉर्ड और सरकारी जवाबदेही के सवाल के रूप में सामने ला रही है।

RTI का जवाब खोलेगा 25 साल पुराने राज का दस्तावेजी पन्ना

गृह विभाग द्वारा RTI को DGP कार्यालय स्थानांतरित किए जाने के बाद अगला महत्वपूर्ण पड़ाव सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाओं का जवाब है। यदि आयोग की रिपोर्ट, Action Taken Report, नोटशीट और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि 26 सितंबर 2001 की घटना के बाद सरकारी स्तर पर वास्तव में क्या प्रक्रिया चली और वह कहां तक पहुंची।

25 वर्ष बाद अब सवाल केवल यह नहीं है कि 26 सितंबर 2001 को दीवानी परिसर में क्या हुआ था, बल्कि यह भी है कि उसके बाद सरकारी फाइलों में क्या हुआ।

Dr. Bhanu Pratap Singh