सियासी जमीन पर बृजभूषण शरण सिंह की बेटी की दस्तक: नोएडा से चुनाव लड़ने पर शालिनी सिंह ने तोड़ी चुप्पी

POLITICS





उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी खास पैठ और दबदबे के लिए पहचाने जाने वाले एक सियासी घराने की बेटी अब चुनावी अखाड़े में उतरने के स्पष्ट संकेत दे रही है। इस राजनीतिक चर्चा के केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की पुत्री शालिनी सिंह हैं, जिन्होंने हाल ही में नोएडा से चुनाव लड़ने की अटकलों पर पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है।

​मीडिया को दिए एक इंटरव्यू के दौरान शालिनी सिंह ने चुनावी राजनीति में अपनी दिलचस्पी और भविष्य की योजनाओं पर से पर्दा उठाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने का निर्देश देता है और उन्हें यह विश्वास होता है कि उनका नेतृत्व समाज के लिए प्रभावी सिद्ध होगा, तो वह निश्चित तौर पर चुनावी रण में कूद पड़ेंगी। इस प्रकार उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव लड़ने से इनकार करने के बजाय पूरी गेंद और जिम्मेदारी पार्टी आलाकमान के पाले में डाल दी है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू नोएडा के साथ उनका पुराना और गहरा जुड़ाव है।

​शालिनी सिंह का दावा है कि वह पिछले लगभग 15 वर्षों से लगातार नोएडा क्षेत्र में रहकर सामाजिक और सार्वजनिक रूप से सक्रिय रही हैं। हालांकि, लंबे समय तक उनका यह कार्य परदे के पीछे या बिना किसी सियासी शोर-शराबे के चला, जिसके चलते आम जनता को उनकी वास्तविक पहचान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। कुछ समय पहले जब उनकी कुछ चुनिंदा कविताएं सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तब लोगों का ध्यान उनकी तरफ आकर्षित हुआ और जनता को यह पता चला कि वह किस प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं।

​उनकी इस बढ़ती सक्रियता को केवल राजनीतिक चश्मे से देखे जाने पर शालिनी का कहना है कि वह अपनी राजनीति को किसी एक दायरे या पार्टी की सीमाओं तक सीमित नहीं मानतीं। उनके अनुसार, किसी भी नेता की असली पहचान किसी दल के नाम या टिकट से नहीं, बल्कि उसके जमीनी कामकाज और नेतृत्व क्षमता से तय होती है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी राजनीतिक और वैचारिक तैयारी का एक और मजबूत संकेत देते हुए बताया कि वह राष्ट्रीय सेविका समिति की तीसरे वर्ष की पूरी तरह प्रशिक्षित सदस्य हैं और हाल ही में उन्होंने नागपुर में अपना यह उच्च प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है।

​चुनावी मैदान में उतरने की इन संभावनाओं के बीच उनका यह संगठनात्मक और वैचारिक जुड़ाव सियासी गलियारों में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या वह आगामी चुनावों में बीजेपी के टिकट पर नोएडा से ताल ठोकेंगी? इस पर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद, परिवारवाद और नेपोटिज्म जैसे संवेदनशील सवालों पर खुलकर बात करते हुए शालिनी ने माना कि एक बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से उनके ऊपर अपनी काबिलियत साबित करने की दोहरी चुनौती है। उनका मानना है कि यदि परिवार की पृष्ठभूमि की वजह से उन्हें शुरुआती स्तर पर कुछ सुविधाएं मिल भी जाती हैं, तो आम जनता का वास्तविक और स्थायी भरोसा जीतने के लिए उन्हें सामान्य से कहीं अधिक कड़ी मेहनत करनी होगी।




Dr. Bhanu Pratap Singh