लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोमती नदी के तट पर स्थित समाधि स्थल पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रख्यात साहित्यकार एवं शिक्षाविद आचार्य नरेंद्र देव को नमन कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखे हमले किए। उन्होंने भाजपा को ‘गैंग’ करार देते हुए संघ पर अतीत में लगे प्रतिबंध का उल्लेख किया और कहा कि हमारे देश को सांप्रदायिक ताकतों (कम्युनल फोर्सेज) से सबसे बड़ा खतरा है।
विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की रामलीला मैदान में होने वाली रैली के विरोध में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 1 नवंबर (रविवार) को सुबह 11 बजे पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर इलाके में एक विशाल मार्च निकालने का फैसला किया गया है। इस संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा को ‘गैंग’ बता दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा नकारात्मक सोच और समाज में दरार डालने वाली (विभाजनकारी) विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है।
सरदार पटेल जयंती पर संघ पर लगे बैन को किया याद
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का संदर्भ देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने संघ पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने सांप्रदायिक ताकत यानी आरएसएस को बैन किया था। हमारे मुल्क को सबसे बड़ा खतरा इन्हीं सांप्रदायिक ताकतों से है। जब यह सांप्रदायिक ताकतें समाप्त होंगी, तभी हमारा लोकतंत्र और अधिक जीवंत एवं मजबूत हो सकेगा।
’मॉक पार्लियामेंट’ पर दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निवास पर आयोजित हो रही मॉक पार्लियामेंट के विषय में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “चूंकि वर्तमान सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं है, इसलिए इस ‘नकली संसद’ का आयोजन किया जा रहा है। इसका स्पष्ट उद्देश्य यह संदेश देना है कि निर्वाचन आयोग अब निष्पक्ष नहीं रहा, बल्कि वह हमारे लोकतंत्र और संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बन गया है। आज जब हम पूज्य आचार्य नरेंद्र देव को याद कर रहे हैं, तो हमारी पार्टी के सांसद भी इस ‘नकली संसद’ में हिस्सा ले रहे हैं।”
उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आगे कहा, “भारतीय जनता पार्टी आखिर इतनी घबराई हुई क्यों है? अगर भाजपा संसद में लिए गए फैसलों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं कर रही है, तो उसने महिलाओं के आरक्षण पर पहले से पारित कानून को अब तक लागू क्यों नहीं किया? वह इस मुद्दे पर बहस क्यों नहीं कराना चाहती? हमने देखा था कि पिछले लोकसभा सत्र के दौरान क्या हुआ था। जिन लोगों ने श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और लोगों की आस्था से जुड़े चढ़ावे को ही हड़प लिया हो… उनसे हम लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की क्या उम्मीद कर सकते हैं?”
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