​संयुक्त राष्ट्र दिवस पर मित्र सोसाइटी की संगोष्ठी: “युद्धों, अमेरिकी दबदबे और ऊर्जा संकट से घिरी दुनिया में UN को मजबूत करना जरूरी”

PRESS RELEASE

आगरा: वर्तमान में जारी युद्धों, महाशक्तियों के दबदबे और भविष्य में मंडरा रहे ऊर्जा व जल संकट की आशंकाओं के बीच वैश्विक शांति और आपसी सहयोग को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल ताकत या सैन्य बल के सहारे नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और साझा संकल्प से ही संभव है। यह विचार संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर मित्र सोसाइटी की ओर से नागरी प्रचारिणी सभा के पुस्तकालय सभागार में आयोजित एक विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए।

‘वैश्विक चुनौतियां और समाधान’ विषय पर केंद्रित इस संगोष्ठी में संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान भूमिका, युद्धों के दुष्परिणाम, अमेरिकी दबदबे, चिकित्सा व शिक्षा की बढ़ती लागत और आध्यात्मिक शांति जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से मंथन किया गया।

​छोटे देशों को मजबूत करना और बहुपक्षीयता जरूरी: प्रो. अरुणोदय बाजपेयी

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आगरा कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अरुणोदय बाजपेयी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को धरातल पर अधिक प्रभावी बनाने के लिए छोटे देशों की भागीदारी और उनकी स्थिति को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का प्राचीन दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश आज की वैश्विक समस्याओं के समाधान का सबसे सटीक मार्ग दिखाता है। युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया में भी शांति का रास्ता निकल सकता है, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसके लिए दृढ़ संकल्पित हो।

​प्रो. बाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि इस संगठन ने विभिन्न राष्ट्रों के बीच संघर्ष टालने और वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। अमेरिका की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने वहां की चुनावी प्रक्रिया के संदर्भ में भविष्य में अमेरिकी दबदबे और रणनीतियों में बदलाव की संभावना भी जताई।

​युद्ध से कोई समाधान नहीं, ऊर्जा और जल संकट सबसे बड़ा खतरा

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर विनोद दत्ता ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि युद्ध में कभी भी किसी पक्ष की वास्तविक जीत नहीं होती। एक युद्ध किसी भी देश को विकास के मामले में कम से कम 20 साल पीछे धकेल सकता है। ऐसे दौर में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, हालांकि कुछ अपवादों को छोड़कर यह संगठन दुनिया की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया है।

​उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में संभावित संघर्षों के पीछे ईंधन, ऊर्जा और पानी की किल्लत सबसे बड़े कारण बन सकते हैं। दुनिया को ‘डॉलर टेररिज्म’ से मुक्ति दिलाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि आम तौर पर लोग केवल स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करते हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक विमर्श होना आवश्यक है।

​चिकित्सा और शिक्षा तक आसान हो आम आदमी की पहुंच

विशिष्ट अतिथि डॉ. डीवी शर्मा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सरकारों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी और अनिवार्य जरूरतों पर कर (Tax) लगाने के बजाय इनकी पहुंच आम जनता के लिए सुगम बनानी चाहिए। दुनिया के कई हिस्सों में इलाज और शिक्षा बेहद खर्चीली हो चुकी है, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

​वहीं, दूसरी ओर विशिष्ट अतिथि बीके रश्मि सिंह ने आध्यात्मिकता और मानसिक शांति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाएं और आधुनिक तकनीकें जीवन को आसान जरूर बनाती हैं, लेकिन वास्तविक आंतरिक सुकून केवल आध्यात्मिक संतुलन और आत्मिक मौन से ही प्राप्त हो सकता है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने एक भक्ति गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

​ग्लोब पर माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ और दीपोत्सव

​कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा ग्लोब पर माल्यार्पण कर संयुक्त रूप से की गई। संस्था के अध्यक्ष डॉ. महेश धाकड़ ने यूएनओ की स्थापना के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 26 जून 1945 को 50 देशों ने यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे, जो 24 अक्टूबर 1945 को लागू हुआ। इस वर्षगांठ के उपलक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का संदेश माही वी. कुमार ने पढ़कर सुनाया।

​समारोह के अंत में सभी उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने सामूहिक रूप से मोमबत्तियां जलाकर दीपावली की पूर्व बेला में अंधकार मिटाने और समाज में उजाला फैलाने का संदेश दिया। अतिथियों का स्वागत संरक्षक अनिल शुक्ल, अध्यक्ष डॉ. महेश धाकड़, अवधेश उपाध्याय और वंदना तिवारी ने किया, जबकि संचालन डॉ. महेश धाकड़ ने और धन्यवाद ज्ञापन अवधेश उपाध्याय ने किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh