​श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ: शतचंडी पाठ, महायज्ञ और रुद्राभिषेक के साथ गूंजे वैदिक मंत्र

PRESS RELEASE

तप के तेज पर अहंकार का आवरण, भगवान विष्णु की लीला से टूटा नारद जी का मोह

शतचंडी पाठ, हवन और रुद्राभिषेक के साथ श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 का शुभारंभ, प्रथम दिन हुआ नारद मोह लीला का मंचन

15 अक्टूबर को पहली बार आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंचेगी रामबारात, 16 अक्टूबर को शिव वाटिका में होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह

आगरा। नारद मुनि सुनि प्रभु कर करनी। हृदयँ बिचारि हरि भगति बरनी॥ भक्ति, तपस्या और अहंकार के बीच के सूक्ष्म अंतर को दर्शाते नारद मोह प्रसंग के साथ श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 का रविवार को श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव का आरंभ प्रातः शतचंडी पाठ, महायज्ञ और रुद्राभिषेक जैसे पावन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और प्रभु के जयघोष से परिसर भक्तिमय हो उठा।

सायंकाल प्रथम पूज्य गणेश जी, श्री लक्ष्मी नारायण के स्वरूपों की आरती के बाद मंचीय लीला का शुभारंभ किया गया। प्रथम दिवस नारद मोह लीला प्रसंग का मंचन हुआ, जिसमें देवर्षि नारद की तपस्या, मन में उत्पन्न अहंकार और भगवान विष्णु की दिव्य लीला के माध्यम से मोह के निवारण का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

नारद मोह लीला में देवर्षि नारद की तपस्या और कामदेव पर विजय के बाद उनके मन में उत्पन्न अहंकार का प्रसंग भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। तपस्या की सफलता के पश्चात जब नारद जी के मन में अपनी साधना का अभिमान जागा, तब भगवान विष्णु ने अपनी माया के माध्यम से उन्हें यह अनुभव कराया कि आध्यात्मिक मार्ग पर अहंकार भी मनुष्य को मोह के बंधन में बांध सकता है। भगवान की लीला ने देवर्षि नारद को आत्मबोध कराया और भक्ति में विनम्रता का महत्व समझाया।

प्रसंग का संदेश है कि साधना, ज्ञान और उपलब्धियों के बाद भी मनुष्य को अभिमान से दूर रहना चाहिए। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें भक्त स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दे। मंचन के दौरान श्रद्धालु प्रभु की लीलाओं में भावविभोर नजर आए।

नवरात्र में शक्ति आराधना से होगा आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार

श्री मनःकामेश्वर मठ के महंत योगेश पुरी ने बताया कि नवरात्र शक्ति की उपासना, साधना और आत्मशुद्धि का पावन पर्व है। मां भगवती की आराधना से शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है। इसी आध्यात्मिक भाव के साथ रामलीला महोत्सव का शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठानों से किया गया है।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति और भक्ति का विशेष महत्व है। प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, धर्म, मर्यादा और लोककल्याण का आदर्श प्रस्तुत करता है। रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इसके प्रत्येक प्रसंग में समाज और व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी संदेश निहित है।

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि सोमवार को प्रभु श्रीराम जन्म लीला प्रसंग का मंचन किया जाएगा। इसके बाद 15 अक्टूबर को श्रीराम बारात का भव्य आयोजन होगा। इस वर्ष पहली बार रामबारात लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंचेगी। शमशाबाद क्षेत्र को जनकपुरी का स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग की परंपरा का सजीव अनुभव प्राप्त होगा।

उन्होंने बताया कि रामबारात के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में रामभक्ति, धार्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का व्यापक प्रसार होगा। यह आयोजन श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने के साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देगा।

महोत्सव के अंतर्गत 16 अक्टूबर को शिव वाटिका में तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन किया जाएगा। सनातन परंपरा में तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह अत्यंत पवित्र एवं मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक विधि-विधान के साथ होने वाले इस आयोजन में श्रद्धालुओं को वैष्णव परंपरा और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

श्री गिर्राज आदर्श रास लीला एवं रामलीला मंडली, गोवर्धन के कलाकारों द्वारा जयराम शर्मा के निर्देशन में मंचन किया जा रहा है। सोमवार को

Dr. Bhanu Pratap Singh