हिसार/कुरुक्षेत्र: हरियाणा शिक्षा विभाग में राजनीति विज्ञान की प्रवक्ता, प्रसिद्ध साहित्यकार एवं स्तंभकार डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ को शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। ‘शिक्षा सागर फाउंडेशन भारत’ की ओर से कुरुक्षेत्र के गीता ज्ञान केंद्र में आयोजित भव्य शिक्षक सम्मान समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठा प्रदान की गई। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा शिक्षा विभाग के मौलिक शिक्षा निदेशक ने की, जिसमें देशभर के 150 से अधिक उत्कृष्ट शिक्षकों का अभिनंदन किया गया।
घर पहुँचकर दादाजी के हाथों दिलाया गया सम्मान
अपरिहार्य कारणों के चलते डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ कुरुक्षेत्र में आयोजित इस समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकी थीं। आयोजकों ने उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए एक अनूठी पहल की; कार्यक्रम की समन्वयक सुशीला जांगड़ा ने हिसार स्थित उनके निवास स्थान पहुँचकर उनके दादाजी माईलाल उब्बा के हाथों उन्हें यह सम्मान पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान करवाई।
साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा का त्रिवेणी संगम
राजनीति विज्ञान में पीएचडी धारक डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ शिक्षण कार्य के साथ-साथ साहित्य एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनके हजारों शोध-आलेख, संपादकीय और विचार-प्रधान लेख देश-विदेश के प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं। एक स्वतंत्र पत्रकार और कवयित्री के रूप में वे बालिका शिक्षा, स्त्री-अस्मिता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे गंभीर विषयों पर अपनी बेबाक लेखनी चलाती हैं।
उनके शिक्षण एवं मार्गदर्शन के बूते दर्जनों विद्यार्थियों ने शैक्षणिक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। डॉ. प्रियंका का मानना है कि शिक्षा का मूल ध्येय केवल अंक पत्र हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में बौद्धिक विकास, तार्किक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना पैदा करना है।
चर्चित कृतियां और पूर्व में मिले पुरस्कार
डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ की प्रकाशित प्रमुख कृतियों में ‘दीमक लगे गुलाब’, ‘चूल्हे से चाँद तक’, ‘मौन की मुस्कान’, ‘खिड़की से झांकती जिंदगी’, ‘परियों से संवाद’, ‘बच्चों की दुनिया’, ‘समय की रेत पर’, ‘निर्भयें’, ‘Fearless’ और ‘आँचल की चुप्पी’ शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने हरियाणवी लघुकथा-संकलन ‘म्हारी माटी, म्हारे आखर’ का कुशल संपादन भी किया है।
साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए उन्हें पूर्व में आईपीएस मनुमुक्त ‘मानव’ पुरस्कार, नारी रत्न पुरस्कार, हरियाणा की शक्तिशाली महिला पुरस्कार, ग्लोबल सुपर वुमन अवार्ड, नागरिक पत्रकारिता नारद पुरस्कार और साहित्यांचल राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई मानद अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरेट उपाधियों से भी नवाजा जा चुका है।
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