लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई जिले इन दिनों गंभीर बाढ़ की चपेट में हैं, जहां सरकार और प्रशासन द्वारा लगातार राहत व बचाव कार्य किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। इन सबके बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय का एक तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा है कि सरकार के तमाम दावे केवल कागजों और कैमरों की सुर्खियों तक ही सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि न तो कहीं पर्याप्त राहत सामग्री दिखाई दे रही है और न ही प्रशासन को प्रभावित परिवारों की कोई चिंता है। जनता इस वक्त भारी संकट में जीवन जी रही है और सत्ता सिर्फ प्रचार प्रसार में व्यस्त है।
वाराणसी के हालातों को लेकर सरकार को घेरा
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा, “उत्तर प्रदेश बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी हालात बद से बदतर हो चुके हैं। आम जनता पानी में फंसी हुई है, लोगों के घरों के भीतर पानी घुस रहा है, आवागमन के रास्ते पूरी तरह डूबे हुए हैं और किसान अपनी आंखों के सामने अपनी बर्बाद होती फसल को देखकर पूरी तरह बेहाल हैं।”
उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए आगे लिखा, “बड़ा सवाल यह है कि जिस वाराणसी शहर को देश-दुनिया में विकास का एक बड़ा मॉडल बताकर प्रचारित किया जाता है, वहां बाढ़ के सामने सरकार की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था इतनी बेबस और लाचार क्यों नजर आ रही है?”
‘बाढ़ पीड़ितों को भाषण नहीं, तत्काल ठोस मदद चाहिए’
सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अजय राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि बाढ़ पीड़ितों को केवल भाषणबाजी और फोटो खिंचवाने की राजनीति नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें तत्काल राहत और ठोस मदद की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की है कि सभी प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, किसानों की फसल के नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य संचालित किए जाएं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने संसदीय क्षेत्र में जनता का यह बदहाल रूप सरकार के विकास के तमाम दावों की पोल खोलकर रख रहा है। अब सरकार को जनता के सामने आकर यह जवाब देना ही होगा कि आखिर बाढ़ से बेहाल हो चुकी इस जनता की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
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