देशभर में बिगड़ा मौसम का मिज़ाज: यूपी-बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक मूसलाधार बारिश का तांडव, 18 राज्यों में अलर्ट जारी

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नई दिल्ली: देशभर में इन दिनों प्रकृति का विकराल और डरावना रूप देखने को मिल रहा है, जहां मानसून की बेमौसम और मूसलाधार बारिश आम जनजीवन के लिए राहत की जगह बड़ी मुसीबत साबित हो रही है। खासकर मैदानी और तटीय इलाकों में बादलों की बेरुखी से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक बारिश का सबसे भयावह असर साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है, जिससे आम जनता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश में बादलों का सबसे ज्यादा प्रकोप बरस रहा है, जहां लगातार हो रही भारी बारिश के कारण राज्य की तमाम प्रमुख और छोटी नदियां या तो खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं या फिर उसके बेहद करीब बह रही हैं। जलस्तर में खतरनाक बढ़ोतरी और पानी के तेज बहाव के दबाव के चलते हाल ही में एक पुराना और बेहद महत्वपूर्ण पुल भरभराकर ढह गया। इस अप्रत्याशित हादसे की वजह से आसपास के दर्जनों ग्रामीण इलाकों का मुख्य शहरों से सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। गनीमत यह रही कि जिला प्रशासन ने खतरे को भांपते हुए समय रहते उस रास्ते पर आवाजाही रोक दी थी, जिससे एक बड़ा और भयानक हादसा होने से बाल-बाल टल गया। इसके बावजूद, नदी के तटीय इलाकों और डूब क्षेत्र में बसे लोगों को प्रशासनिक अमले द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने की सख्त हिदायत दी गई है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

पड़ोसी सूबे बिहार में भी प्रकृति का ऐसा ही रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जहां हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। राजधानी पटना, ऐतिहासिक शहर भागलपुर और बक्सर समेत राज्य के कई प्रमुख जिलों में गंगा नदी समेत अन्य सहायक नदियां उफान पर हैं और उनका पानी किनारों को तोड़कर रिहायशी बस्तियों में प्रवेश कर चुका है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि निचले इलाकों में रहने वाले लोग अपना घर-बार और आशियाना छोड़कर सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हो चुके हैं। इसके साथ ही, लगातार हो रहे भीषण जलभराव और नदी के कटाव के कारण किसानों की तैयार फसलें पानी में डूबकर पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे अन्नदाताओं को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

​दूसरी ओर, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई संवेदनशील जिलों में भी मौसम विभाग ने गंभीर स्थिति को देखते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया है। इन दोनों राज्यों में अगले कुछ घंटों के दौरान तेज आंधी-तूफान चलने, बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बिजली गिरने और अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका जताई गई है। पहाड़ी अंचलों से लेकर मैदानी इलाकों तक सड़कों पर भारी मात्रा में पानी भर जाने के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोगों की आवाजाही थम सी गई है। किसी भी अप्रत्याशित आपात स्थिति या आपदा से त्वरित निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ और राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की विशेष टीमों को हाई अलर्ट पर तैनात किया गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा और उत्तराखंड समेत देश के कुल 18 राज्यों में अगले दो दिनों तक मूसलाधार बारिश का यह सिलसिला लगातार जारी रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से खास अपील की है कि जब तक कोई अत्यंत आवश्यक कार्य न हो, तब तक वे अपने घरों से बाहर निकलने से बचें। विशेष रूप से जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाने से परहेज करें और सुरक्षा की दृष्टि से बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर तथा पुराने जर्जर पेड़ों के नीचे बिल्कुल भी शरण न लें। किसी भी संकट या आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्थानीय जिला प्रशासन या आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क स्थापित करें। फिलहाल, बिगड़ते हालातों को देखते हुए सभी प्रभावित राज्यों में सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गई है और चौबीसों घंटे संचालित होने वाले कंट्रोल रूम के जरिए स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh