ताजमहल मोमेंटो के सामने आरती को अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने बताया ‘छपास रोग और दिखावा’, बोले- शिव मंदिरों में क्यों नहीं जाते ये नेता?

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आगरा। कैंट रेलवे स्टेशन पर स्थित ताजमहल के मोमेंटो (प्रतिकृति) के सामने हाल ही में कुछ लोगों द्वारा की गई आरती को लेकर विवाद गहरा गया है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इस कृत्य को ‘छपास रोग’ और महज एक दिखावा करार दिया है। उन्होंने सवाल खड़े किए कि जो लोग ताजमहल के मॉडल के सामने आरती कर रहे हैं, वे शहर के सैकड़ों प्राचीन शिव मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना क्यों नहीं करते?

​मोमेंटो का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना

अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने स्पष्ट किया कि कैंट स्टेशन पर ताजमहल का यह मोमेंटो आगरा मंडल व्यापार संगठन के संस्थापक और वरिष्ठ व्यापारी नेता स्वर्गीय गोविंद अग्रवाल की स्मृति में लगाया गया था। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय गोविंद अग्रवाल ने मरणोपरांत अपनी देह दान कर एक मिसाल पेश की थी। उनके जन्मदिन पर संगठन द्वारा स्थापित इस मॉडल का एकमात्र उद्देश्य उन पर्यटकों को ताजमहल की झलक दिखाना था, जो समय की कमी के कारण ताजमहल तक नहीं जा पाते। इससे शहर में आने वाले यात्रियों में पर्यटन के प्रति उत्साह बढ़ता है।

‘दिखावे की राजनीति से परहेज करें’

श्री शर्मा ने कहा, “भगवान शिव मेरे इष्ट देव हैं और मैंने अपने घर के पास एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया है, जहाँ मैं नियमित रूप से पूजा और सेवा करता हूँ। लेकिन ये तथाकथित नेता कभी किसी शिव मंदिर में न तो सफाई करते दिखे और न ही कभी पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। वे केवल कैमरों के सामने दिखावा करने के लिए ऐसे स्थानों का चयन करते हैं।”

​कोर्ट तय करेगा ताजमहल का सच

वरिष्ठ अधिवक्ता ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि इन लोगों को लगता है कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है, तो वे सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ें। उन्होंने कहा, “अगर वे ताजमहल के दावे को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें अदालत में जाकर संघर्ष करना चाहिए। कोर्ट जो फैसला करेगा, उसके बाद ही उन्हें अधिकार होगा कि वे ताजमहल के अंदर या बाहर आरती करें। लेकिन बिना किसी आधार के सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का कार्य करना शोभा नहीं देता।” उन्होंने विरोध करने वालों की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ लोगों की आदत ही हर अच्छे कार्य का विरोध करना बन गई है।

Dr. Bhanu Pratap Singh