​”काफिले क्यों लूटे?”: राम मंदिर मामले पर हरीश रावत का योगी सरकार से तीखा सवाल

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देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़ी संस्थाओं में कथित गबन व दान की लूट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्वामी करपात्री जी के बयानों का समर्थन करते हुए मांग की है कि जब तक ट्रस्ट से जुड़े संबंधित लोगों को उनके पदों से हटाया नहीं जाता, तब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

“भाजपा परिवार के भीतर से भी उठने लगे सवाल”

​हरीश रावत ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से कहा कि अब केवल इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A. Alliance) ही नहीं, बल्कि भाजपा परिवार के भीतर से भी राम मंदिर में दान की लूट और घोटालों की आशंका व्यक्त की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रहा है, यह एक ‘संगठित लूट’ के रूप में सामने आ रहा है।

​”भगवान राम के नाम पर छल”

कांग्रेस नेता ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में कहा कि किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि ‘कथित राम भक्त’ ही भगवान श्री रामचंद्र जी के नाम के साथ इस तरह की स्थिति पैदा करेंगे। हरीश रावत ने आगे कहा, “जन भावनाएं बहुत आहत हुई हैं। लोग अब योगी जी से सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि इधर-उधर की बातों को छोड़िए और यह स्पष्ट कीजिए कि दान के काफिले क्यों लूटे गए हैं?”

​हरीश रावत ने इस पूरे प्रकरण को धार्मिक आस्था के साथ एक बड़ा खिलवाड़ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवान के नाम पर इकट्ठा किए गए चंदे और दान की पारदर्शिता को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, वे अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग को दोहराते हुए कहा कि जनता को जवाबदेही चाहिए, न कि केवल बयानबाजी।

इस बयान के साथ हरीश रावत ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है, जिससे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रस्ट में बैठे लोग अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिसकी एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी अनिवार्य है।

Dr. Bhanu Pratap Singh