आगरा। ताजनगरी आगरा के प्रसिद्ध सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) ने चिकित्सा और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक स्थित न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने पहली बार मस्तिष्क की नसों (रक्त वाहिकाओं) से जुड़ी एक बेहद दुर्लभ और जटिल बीमारी ब्रेन आर्टेरियोवेनस मालफॉर्मेशन (AVM) का रक्त वाहिकाओं के रास्ते (एंडोवास्कुलर तकनीक) अत्यंत सफल उपचार किया है।
मिनिमली इनवेसिव एंडोवास्कुलर तकनीक का सहारा लेते हुए डॉक्टरों ने एक 19 वर्षीय नवयुवक के दिमाग में मौजूद इस खतरनाक एवीएम को पूरी तरह से ब्लॉक (बंद) कर दिया। इलाज के बाद पोस्ट-ऑपरेटिव जांचों में यह एवीएम शत-प्रतिशत बंद पाया गया। सबसे राहत और खुशी की बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को किसी भी प्रकार का नया न्यूरोलॉजिकल नुकसान (जैसे लकवा या अन्य समस्या) नहीं हुआ और उसे पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
इस उपलब्धि के साथ एसएन मेडिकल कॉलेज ने जटिल न्यूरोवास्कुलर बीमारियों के आधुनिक उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इस प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों ने रक्त वाहिकाओं के रास्ते मस्तिष्क में मौजूद असामान्य रक्त प्रवाह को बंद करने की तकनीक का इस्तेमाल किया। इसी उपलब्धि के अवसर पर एवीएम लाइव कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें नोएडा से आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. अंशुल जैन फैकल्टी के रूप में शामिल हुए।
मस्तिष्क में रक्तस्राव के बाद बिगड़ी थी युवक की हालत
एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचे 19 वर्षीय युवक को करीब दो महीने पहले मस्तिष्क में रक्तस्राव हुआ था। इसके बाद उसके शरीर के एक तरफ कमजोरी आने लगी थी और उसे दौरे पड़ने की शिकायत भी थी। इन लक्षणों के बाद की गई जांच में मस्तिष्क के दाहिने हिस्से में एवीएम का पता चला। ब्रेन एवीएम ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की धमनियों और शिराओं के बीच असामान्य रक्त वाहिकाओं का जाल बन जाता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और कुछ मामलों में मस्तिष्क में रक्तस्राव जैसी गंभीर जटिलता भी पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में उपचार का निर्णय एवीएम की स्थिति, आकार और मरीज की चिकित्सकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाता है। युवक का मामला भी चुनौतीपूर्ण था।
विशेषज्ञों की टीम ने जांच के बाद रक्त वाहिकाओं के रास्ते एवीएम को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई। उपचार के बाद की गई जांच में एवीएम पूरी तरह बंद मिला। मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और प्रक्रिया के बाद कोई नया न्यूरोलॉजिकल नुकसान सामने नहीं आया। इसके बाद उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
जटिल उपचार में मिली सफलता
न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. तरुणेश शर्मा ने बताया कि एवीएम का उपचार जटिल होता है और इस तरह के मामलों में विशेष तकनीकी दक्षता की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “एवीएम का उपचार जटिल होता है। यह एक चुनौतीपूर्ण केस था और इसका सफल उपचार एसएनएमसी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने बताया कि इस मामले में मरीज का सफल उपचार करना विभाग के लिए महत्वपूर्ण है। मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी ऐसी बीमारी में सटीक जांच, उपचार की सही रणनीति और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय की अहम भूमिका होती है।
एक साल से नियमित हो रहे एंडोवास्कुलर उपचार
डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में पिछले लगभग एक वर्ष से एंडोवास्कुलर उपचार नियमित रूप से किए जा रहे हैं। ब्रेन एवीएम का यह संस्थान में पहला मामला है, जिसमें इस तकनीक से सफल उपचार किया गया। एंडोवास्कुलर उपचार में शरीर की रक्त वाहिकाओं के भीतर से विशेष उपकरणों और कैथेटर की मदद से प्रभावित हिस्से तक पहुंचा जाता है। ब्रेन एवीएम के मामले में इस तकनीक के जरिए असामान्य रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह को बंद करने का प्रयास किया जाता है। इससे मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार उपचार का एक आधुनिक विकल्प उपलब्ध हो सकता है। एसएनएमसी में इस तरह के उपचार की सुविधा विकसित होने से जटिल न्यूरोवास्कुलर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकती है।
आयुष्मान योजना से जरूरतमंदों को आधुनिक उपचार
न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को इस तरह के आधुनिक उपचार नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। वहीं, एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि संस्थान गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना है कि कॉलेज का निरंतर प्रयास है कि गंभीर और जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए दूसरे बड़े संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े और उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज में ही आधुनिक इलाज मिल सके।
विशेषज्ञों और मेडिकल टीम के समन्वय से मिली सफलता
इस जटिल उपचार को सफल बनाने में न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम के साथ एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, रेजिडेंट डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उपचार प्रक्रिया में डॉ. राहुल सिंह और डॉ. मोहित मंगला ने योगदान दिया। एनेस्थीसिया टीम से डॉ. अर्चना अग्रवाल और डॉ. लवप्रिया शर्मा सहित रेजिडेंट्स एवं अन्य संबंधित कर्मचारी भी शामिल रहे।
एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्रेन एवीएम का यह पहला सफल एंडोवास्कुलर उपचार संस्थान की न्यूरोवास्कुलर चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे जटिल मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के आधुनिक उपचार को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
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