आगरा। गुजरात के सूरत शहर से गिरफ्तार कर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर ले जाया जा रहा एक अभियुक्त आगरा की सीमा में पुलिस अभिरक्षा से चलती ट्रेन से छलांग लगाकर फरार हो गया। इस दुस्साहसिक घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोपी के इस तरह भाग निकलने के बाद उसकी सुरक्षा और निगरानी में तैनात रहे तीनों पुलिसकर्मी अब गंभीर विभागीय और कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। जीआरपी (GRP) आगरा फोर्ट में तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है।
यह पूरा मामला मिर्जापुर जनपद के थाना पड़री में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे की विवेचना से जुड़ा हुआ है। मिर्जापुर पुलिस की एक टीम ने आरोपी सूरज कुमार पांडेय उर्फ हर्ष पांडेय को गुजरात के सूरत स्थित उमरा इलाके से धर दबोचा था। इसके बाद आरोपी और पीड़िता को साथ लेकर पुलिस टीम ट्रेन के जरिए मिर्जापुर के लिए रवाना हुई थी। इस दल में उपनिरीक्षक विजय शंकर यादव, महिला हेड कांस्टेबल गीता देवी और कांस्टेबल नीरज कुमार शामिल थे।
चलती ट्रेन से कूदा आरोपी, मची अफरातफरी
बताया जा रहा है कि 4 और 5 सितंबर की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे मधुबनी एक्सप्रेस आगरा क्षेत्र के श्रृंगारपुर और किरावली रेलवे स्टेशन के बीच पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी। इसी दौरान मौका पाकर शातिर आरोपी ने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी और रात के अंधेरे का पूरा फायदा उठाते हुए फरार हो गया। आरोपी के अचानक ट्रेन से कूदते ही साथ चल रहे पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए और उनमें अफरातफरी मच गई। ट्रेन रुकने के बाद आसपास के जंगली और सुनसान इलाके में उसकी काफी तलाश की गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
इस सनसनीखेज घटना की तत्काल सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई, जिसके बाद पुलिस की लचर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लाजिमी थे। इसके बाद उपनिरीक्षक जयप्रकाश की ओर से जीआरपी आगरा फोर्ट में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। इस शिकायत में आरोपी को लाने के दौरान उसकी निगरानी में भारी लापरवाही बरतने का स्पष्ट आरोप लगाया गया है।
जीआरपी ने दर्ज किया मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी आगरा फोर्ट ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए उपनिरीक्षक विजय शंकर यादव, महिला हेड कांस्टेबल गीता देवी और कांस्टेबल नीरज कुमार के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 261 और 262 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम के हर एक पहलू की तकनीकी और कागजी जांच कर रही है।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कड़े पहरे और पुलिस अभिरक्षा के बीच मौजूद आरोपी आखिर चलती ट्रेन से इतनी आसानी से बाहर कैसे कूद गया? क्या आरोपी की हथकड़ी ढीली थी या फिर सुरक्षा व्यवस्था में कोई गंभीर चूक हुई थी? जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय पुलिसकर्मी क्या कर रहे थे? इन तमाम सुलगते सवालों के जवाब पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल फरार आरोपी की सरगर्मी से तलाश की जा रही है, जबकि अपनी ड्यूटी में कोताही बरतने वाली पुलिस टीम को अब कानून और विभाग की दोहरी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
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