आगरा की ऐतिहासिक पच्चीकारी कला से इस बार सजेगी भाइयों की कलाई, ताजमहल की नक्काशी वाली संगमरमर की शाही राखियां बाजार में छाईं

REGIONAL

आगरा: भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम, गहरे विश्वास और आजीवन सुरक्षा के संकल्प का पावन पर्व ‘रक्षाबंधन’ इस बार ताजनगरी आगरा में एक बिल्कुल ही अलौकिक और ऐतिहासिक अंदाज में विशेष बनता नजर आ रहा है। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल की दीवारों पर अपनी बेजोड़ खूबसूरती और नक्काशी से चार चांद लगाने वाली सदियों पुरानी पारंपरिक पच्चीकारी कला (Inlay Art) ने अब एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। यही प्रसिद्ध कलाकारी अब भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की अमिट पहचान बनने वाली खूबसूरत और शाही ‘राखी’ के रूप में जीवंत हो उठी है।

इन दिनों आगरा के बाजारों और कार्यशालाओं में पूरी शुद्धता के साथ संगमरमर (मार्बल) और नेचुरल सेमी-प्रेशियस स्टोन्स (मूल्यवान प्राकृतिक पत्थरों) की मदद से बेहद आकर्षक, नायाब और आधुनिक डिजाइनों वाली राखियां तैयार की जा रही हैं।

इन कलात्मक राखियों को सजाने के लिए लैपिस लाजुली (Lapis Lazuli), फ़िरोज़ा (Turquoise) और कई अन्य बेशकीमती व दुर्लभ पत्थरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इन कीमती पत्थरों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें केवल भारत के विभिन्न कोनों से ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर दुनिया के कई अलग-अलग देशों से आयात किया जाता है।

आगरा के प्रसिद्ध इनले वर्क फैक्ट्री के ओनर अदनान शेख ग्राहकों की विशेष पसंद, बाजार की आधुनिक डिमांड और विशेष ऑर्डर्स को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कलात्मक डिजाइनों और दुर्लभ पत्थरों के मेल से इन अनोखी राखियों का निर्माण करवा रहे हैं।

यदि बात करें पच्चीकारी की, तो यह आगरा की एक बेहद प्राचीन, समृद्ध और पारंपरिक पहचान रही है, जिसमें कठोर से कठोर पत्थरों को बहुत बारीकी से तराशकर संगमरमर की सतह पर इस गजब की नफासत और सटीकता के साथ सेट किया जाता है कि डिजाइन का हर एक हिस्सा अपनी जगह बिल्कुल सटीक बैठता है। यह अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं लगने वाला बेहद बारीक, पेचीदा और कठिन हुनर है, जिसके दम पर आगरा की इस नायाब कला की धूम न केवल ताजमहल तक सीमित है, बल्कि समूची दुनिया के तमाम देशों तक फैली हुई है।

अब इसी गौरवशाली और ऐतिहासिक विरासत को एक नए और आधुनिक कलेवर में ढालकर राखी के पवित्र माध्यम से पुनर्जीवित किया गया है।

इसका सबसे खूबसूरत परिणाम यह देखने को मिल रहा है कि इस रक्षाबंधन पर कला और संस्कृति प्रेमियों की कलाई पर केवल एक साधारण सूती धागा नहीं बंधेगा, बल्कि आगरा के पारंपरिक और हुनरमंद कारीगरों का बेजोड़ कौशल तथा भाई-बहन के रिश्ते की अमिट मिठास हमेशा के लिए अमर हो जाएगी।

Dr. Bhanu Pratap Singh