आगरा में गणपति विसर्जन की अनूठी पहल: यमुना में सीधे विसर्जन पर रोक, प्रमुख घाटों पर बनाए गए गंगाजल से भरे कृत्रिम विसर्जन कुंड

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​आगरा। जनपद में गणपति बप्पा की विदाई के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और पवित्र यमुना नदी की स्वच्छता दोनों का विशेष ध्यान रखा गया है। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर आगरा नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न यमुना घाटों पर सभी तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं।

यमुना नदी को प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले जल प्रदूषण से बचाने के लिए इस बार भी नदी के अंदर सीधे विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। इसके विकल्प के तौर पर प्रमुख घाटों पर विशेष अस्थाई कृत्रिम विसर्जन कुंड तैयार किए गए हैं, जिन्हें पवित्र गंगाजल से भरा गया है।

शहर के प्रसिद्ध हाथीघाट, कैलाश घाट, बल्केश्वर और दशहरा घाट पर गणेश विसर्जन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जहां श्रद्धालु पूरी विधि-विधान के साथ बप्पा को विदाई दे सकेंगे।

​यमुना में सीधे विसर्जन पर प्रतिबंध, बनाए गए कृत्रिम कुंड

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों और जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने के नियमों के तहत प्रतिमाओं का सीधे नदी में विसर्जन प्रतिबंधित किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने यमुना के तटों पर अस्थाई विसर्जन कुंड बनवाए हैं। इन कुंडों में गंगाजल की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं की धार्मिक परंपराओं में कोई बाधा न आए। प्रशासन और नगर निगम लगातार श्रद्धालुओं से यह अपील कर रहे हैं कि वे गणेश मूर्तियों को सीधे यमुना में प्रवाहित करने के बजाय इन निर्धारित कृत्रिम कुंडों में ही विसर्जित करें।

​सुरक्षा और सजावट के पुख्ता इंतजाम

विसर्जन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं। सभी अस्थाई विसर्जन कुंडों के चारों ओर मजबूत बैरीकेडिंग की गई है, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से और बिना किसी भगदड़ के प्रतिमा विसर्जन कर सकें। इसके साथ ही प्रमुख घाटों पर नगर निगम के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है जो सफाई व्यवस्था पर नजर रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की हरसंभव सहायता भी करेंगे। बप्पा की विदाई को यादगार और सुंदर बनाने के लिए हाथीघाट समेत अन्य प्रमुख स्थलों पर आकर्षक रंगोलियां भी सजाई गई हैं।

अधिकारियों ने किया घाटों का निरीक्षण

विसर्जन व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने मैदानी दौरा किया। अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार ने सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम के साथ हाथीघाट पहुंचकर सुरक्षा, सफाई, बैरीकेडिंग और विसर्जन कुंडों की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान क्षेत्रीय जेडएसओ आशुतोष वर्मा को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विसर्जन के दौरान घाटों पर पर्याप्त संख्या में कर्मचारी मुस्तैद रहें और श्रद्धालुओं को हर संभव सहयोग प्रदान करें।

आस्था और पर्यावरण का अनूठा समन्वय

सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि नगर निगम की इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए यमुना नदी को प्रदूषण से सुरक्षित रखना है। इस बार गणपति बप्पा की विदाई केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि ‘आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण’ का एक बड़ा संदेश बन रही है—बप्पा को प्रेमपूर्वक विदाई भी मिलेगी और हमारी जीवनदायिनी यमुना भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

Dr. Bhanu Pratap Singh