अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: आरोपी लवकुश मिश्रा की बढ़ी मुश्किलें, निर्माणाधीन आलीशान मकान पर मंडराया बुलडोजर का साया

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अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा के कारनामे अब उसकी निजी संपत्ति पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। इस मामले में जांच एजेंसियों की सख्ती के बीच अब जिला प्रशासन ने भी मोर्चा खोल दिया है। लवकुश की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बनाए जा रहे आलीशान मकान को लेकर अथॉरिटी ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है.

प्रशासन ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इस निर्माणाधीन संपत्ति पर बुलडोजर चला दिया जाएगा।

आलीशान मकान और संदिग्ध निवेश

अयोध्या के शहादत गंज इलाके में जय पुरिया स्कूल के समीप लवकुश मिश्रा एक आलीशान तीन मंजिला मकान का निर्माण करवा रहा था, जो लगभग पूर्णता की ओर था। 1,000 स्क्वायर फीट में फैली इस जमीन को लवकुश ने अक्टूबर 2025 में अपनी पत्नी के नाम पर खरीदा था। पड़ोसियों का दावा है कि जमीन की खरीद और निर्माण में अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसमें 25 लाख रुपये की जमीन और 80 से 90 लाख रुपये का निर्माण खर्च शामिल है।

साज-सज्जा और सुविधाओं का जाल

स्थानीय निवासी राजकुमार पांडे के अनुसार, इस मकान को बेहद आधुनिक तरीके से तैयार किया जा रहा था। पहली मंजिल पर चार बड़े कमरों के साथ विशाल किचन और लिफ्ट लगाने के लिए विशेष स्पेस छोड़ा गया था। वहीं दूसरी मंजिल पर ‘कमरे के अंदर कमरा’ का कांसेप्ट रखा गया था और तीसरी मंजिल के लिए भी तैयारी पूरी थी। यह मकान आरोपी की आर्थिक स्थिति से कहीं अधिक भव्य था, जो जांच के दायरे में आने के बाद चर्चा का विषय बन गया है।

​20 हजार की आय और करोड़ों का साम्राज्य

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मात्र 20,000 रुपये प्रति माह कमाने वाला एक कर्मचारी इतनी बड़ी संपत्ति कैसे खड़ी कर रहा था? राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में 14.25 लाख रुपये की नकद बरामदगी के बाद लवकुश मिश्रा के बैंक खातों और संपत्ति के ब्योरे खंगाले जा रहे हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही पूरा परिवार भूमिगत है और मकान का काम भी अचानक रोक दिया गया है।

​प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

प्रशासन द्वारा जारी नोटिस ने इस पूरे प्रकरण को एक नया मोड़ दे दिया है। अयोध्या प्रशासन अब यह जांचने की तैयारी में है कि क्या इस निर्माण के लिए सभी आवश्यक अनुमति ली गई थी और इसमें लगी रकम का स्रोत क्या है। फिलहाल, नोटिस की समय-सीमा खत्म होते ही प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। यह घटनाक्रम न केवल आरोपी के लिए बड़ा झटका है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है जिन्होंने मंदिर के धन के दुरुपयोग से अपनी संपत्तियां खड़ी की हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh