​आगरा में ललित की संदिग्ध मौत मामला: अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की

स्थानीय समाचार

आगरा: रकाबगंज थाना क्षेत्र के रावली इलाके में हुई ललित की संदेहास्पद मौत के मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का सीधा आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा ने तीखा तेवर अपना लिया है। बुधवार को महासभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार से औपचारिक मुलाकात कर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल हत्या का मुकदमा दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की पुरजोर मांग की। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज के लोग जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

​जुए की सूचना पर दबिश और तीसरी मंजिल से नीचे फेंकने का गंभीर आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 16 अक्टूबर की रात रावली क्षेत्र में जुआ खेले जाने की सूचना पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुँचे थे। आरोप है कि वहाँ पहुँचने पर पुलिसकर्मियों और ललित के बीच तीखी कहासुनी हो गई। स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि घटना से एक-दो दिन पहले भी वही पुलिसकर्मी वहाँ आए थे और कथित तौर पर 60 से 70 हजार रुपये का जुआ लूटकर ले गए थे, हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

​परिजनों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि 16 अक्टूबर की रात हुए विवाद के दौरान पुलिसकर्मियों ने ललित को तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया। इसके बाद पुलिसकर्मी मौके से फरार हो गए, जबकि गंभीर रूप से घायल ललित जमीन पर तड़पता रहा। परिजनों का कहना है कि यदि उसे समय पर चिकित्सीय सहायता मिल जाती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद से ही इलाके में भारी रोष व्याप्त है और परिजन लगातार पुलिस पर सबूत मिटाने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

​सीसीटीवी चिप गायब करने और साक्ष्य से छेड़छाड़ के आरोप

​मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना स्थल के समीप लगे सीसीटीवी कैमरे की मेमोरी चिप पुलिसकर्मी खुद निकाल कर ले गए ताकि उनके द्वारा किए गए कृत्य का कोई भी सुबूत सामने न आ सके। इस बीच, मलपुरा थाना क्षेत्र में हुई एक अन्य युवक की मौत की घटना का भी हवाला दिया जा रहा है, जिसमें चौकी के पीछे शव मिलने और सीसीटीवी की डीवीआर गायब होने का मामला सामने आया था। इस पर राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा भी पुलिस कार्यप्रणाली और सबूत मिटाने के तौर-तरीकों पर तीखे सवाल उठाए जा चुके हैं। ललित के मामले में भी सीसीटीवी से जुड़े इन आरोपों ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जांच अधिकारी की कार्यशैली और प्रशासनिक सुस्ती पर नाराजगी

​ललित की मौत के इस संवेदनशील मामले की शुरुआती जांच एसीपी छत्ता श्वेता वर्मा को सौंपी गई है। हालांकि, महासभा के पदाधिकारियों और परिजनों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। परिजनों के मुताबिक, बयान दर्ज करने के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नजर नहीं आ रही है।

दो मासूम बेटियों के सिर से उठा साया, उग्र आंदोलन की चेतावनी

पुलिस कमिश्नर से मुलाकात के दौरान लोधी महासभा के महानगर अध्यक्ष अनुराग राजपूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खाकी को दागदार करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। महासभा के पदाधिकारी लाल सिंह लोधी ने पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि ललित अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी अकाल मौत से दो मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है और पूरा परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है।

​महासभा ने मांग की है कि मृतक के आश्रितों को तुरंत आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि पुलिस ने जल्द ही निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो लोधी समाज आगरा कलेक्ट्रेट पर विशाल एवं उग्र प्रदर्शन करेगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मंगलवार को भाजपा के ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष पूरन सिंह लोधी ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की पुरजोर मांग की थी। लगातार बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बावजूद पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर सवाल बने हुए हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh