अखिलेश के ‘इग्नोर करो’ बयान पर स्वामी प्रसाद मौर्य का करारा जवाब: बोले- सपा से नहीं, कांग्रेस से मांगी है सीट

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लखनऊ। ‘अपनी जनता पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की उस टिप्पणी पर कड़ा पलटवार किया है, जिसमें सपा प्रमुख ने एक दिन पूर्व कहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके साथ सीट बंटवारे में भागीदार नहीं हो सकते। इस पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन का महज एक घटक दल हैं, वे खुद पूरा ‘इंडिया’ गठबंधन नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने सपा के कोटे से कोई सीट नहीं मांगी है, बल्कि उनकी सीधी वार्ता कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई है।

दरअसल, राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से स्वामी प्रसाद मौर्य के विपक्षी गठबंधन में शामिल होने को लेकर प्रश्न पूछा, तो वे असहज और नाराज हो गए। अखिलेश यादव ने तल्ख रुख अपनाते हुए कहा था, “वे हमारी सीटों में शामिल नहीं हो सकते। इस विषय को अवॉयड (दरकिनार) करो, इग्नोर (नजरअंदाज) करो।” सपा प्रमुख की इसी टिप्पणी पर एक समाचार एजेंसी से वार्ता करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया।

मौर्य ने कहा, “पहली बात तो यह है कि वे (सपा) इंडिया गठबंधन की एक सहयोगी पार्टी हैं, अखिलेश यादव स्वयं ‘इंडिया’ गठबंधन नहीं हैं। इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय संयोजक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भी उन्हीं का है। ये हमें सर्टिफिकेट (प्रमाण पत्र) देने वाले आखिर कौन होते हैं? और रही बात सीटों की, तो मैंने इनके कोटे से कोई टिकट मांगा ही नहीं है। हमने तो सीधे कांग्रेस से संवाद किया है। हमारी बातचीत राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे (गौतम जी) से हुई है।”

​अखिलेश यादव पर बोला चौतरफा हमला

​अखिलेश यादव पर अपना हमला जारी रखते हुए अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा, “यदि ये इतने ही काबिल और सर्वमान्य होते तो मैं उत्तर प्रदेश में रहकर इन्हीं से चर्चा करता, फिर मुझे दिल्ली जाकर राहुल जी से बात करने का क्या औचित्य था? सच्चाई तो यह है कि ये ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के दुश्मन नंबर एक हैं। ये मुझे और चंद्रशेखर आजाद को स्वीकार नहीं करना चाहते, तो फिर ये किसको चाहते हैं—नाथवानी (धनराज परिमल नथवानी) को। राज्यसभा में तो आजम खान की पत्नी को भेजा जाना चाहिए था, लेकिन जो शख्स मुश्किल वक्त में आजम खान का ही नहीं हुआ, वह भला स्वामी प्रसाद मौर्य का क्या होगा!”

​3 अक्टूबर को हुई थी राहुल गांधी से मुलाकात

​उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीते 3 अक्टूबर को नई दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात की थी। उस मुलाकात के तुरंत बाद उन्होंने अपनी नवगठित ‘अपनी जनता पार्टी’ के विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान किया था और कहा था कि सीटों के गणित पर बाद में विस्तृत चर्चा होगी। उस दौरान मौर्य ने सार्वजनिक तौर पर राहुल गांधी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने की मंशा भी जाहिर की थी। इससे पूर्व, सपा छोड़ते समय मौर्य ने अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व पर समाजवादी विचारधारा से भटकने तथा उनके साथ लगातार भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए थे।

Dr. Bhanu Pratap Singh