उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के जसराना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पल्या गांव में एक खेत के बीचों-बीच लगभग 7 फुट लंबा मगरमच्छ पहुंच जाने से सनसनी फैल गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश वन विभाग और प्रसिद्ध वन्यजीव संस्था ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ ने आपसी तालमेल से त्वरित कार्रवाई करते हुए इस विशालकाय मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। गनीमत यह रही कि यह मगरमच्छ एक रिहायशी इलाके के बेहद करीब पहुंच चुका था, जिससे किसी भी समय इंसानों और इस खतरनाक वन्यजीव के बीच टकराव या संघर्ष की गंभीर स्थिति पैदा होने की पूरी आशंका बनी हुई थी।
घटना की जानकारी मिलते ही सुबह-सुबह वाइल्डलाइफ एसओएस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद उनकी तीन सदस्यीय विशेष ‘रैपिड रिस्पॉन्स टीम’ तत्काल मौके के लिए रवाना हो गई। रेस्क्यू टीम ने घटनास्थल तक पहुंचने के लिए 100 किलोमीटर से भी अधिक लंबी दूरी तय की। राहत की बात यह रही कि स्थानीय वन विभाग की टीम ने पहले ही तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल को सुरक्षित कर लिया था और किसी भी ग्रामीण या स्थानीय व्यक्ति को मगरमच्छ के करीब जाने से रोकने के लिए पूरे क्षेत्र की प्रभावी घेराबंदी कर दी थी।
वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम द्वारा सफलतापूर्वक रेस्क्यू किए जाने के बाद मगरमच्छ के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की गई, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। उसके शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी चोट या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं पाई गई। इसके पश्चात, इस मार्श मगरमच्छ को पूरी सुरक्षा के साथ उसके एक उपयुक्त और प्राकृतिक प्राकृतिक आवास में ले जाकर वापस छोड़ दिया गया।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयान:
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने इस घटना पर अपनी बात रखते हुए कहा, “जंगली जानवर इंसानी बस्तियों और अपने प्राकृतिक आवास के बीच की अदृश्य सीमाओं को नहीं समझते हैं। मौसम में होने वाले बदलाव और जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण कई बार वन्यजीव अपने सामान्य और सुरक्षित क्षेत्र से बाहर भटक जाते हैं। इस मामले में वन विभाग को समय रहते मिली सटीक सूचना और स्थानीय नागरिकों के सराहनीय सहयोग की वजह से इस रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया जा सका।”
वहीं, वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर – कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स, बैजू राज एम.वी. ने जानकारी देते हुए कहा, “यह खेत एक नहर के बेहद करीब स्थित है और आमतौर पर बारिश के मौसम में पानी का जलस्तर बढ़ जाने पर मगरमच्छ अपने सामान्य क्षेत्र से आगे निकल आते हैं, जिसकी वजह से आम लोगों के साथ उनका आमना-सामना होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे संवेदनशील मामलों में तुरंत सूचना देना और स्थानीय समुदाय के भीतर जागरूकता फैलाना बेहद आवश्यक होता है, ताकि इंसानों और वन्यजीवों—दोनों की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सके।”
वन्यजीव संरक्षण और कानूनी स्थिति:
विशेषज्ञों के अनुसार, मार्श मगरमच्छ (वैज्ञानिक नाम: Crocodylus palustris) को प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था IUCN की ‘रेड लिस्ट’ में ‘Vulnerable’ (संवेदनशील) श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है। इसके अलावा, भारत देश के भीतर यह प्रजाति ‘भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ की अनुसूची I के तहत पूरी तरह संरक्षित है, जो इसे देश भर में सबसे उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है।
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