​देखि रूप मोहिं नयन न तृप्ता…आगरा में भव्य रामलीला का पांचवां दिन: धनुष भंग होते ही गूंज उठा जनकपुर, प्रभु श्रीराम के गले में पड़ी माता सीता की जयमाला

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आगरा। “देखि रूप मोहिं नयन न तृप्ता…” के भाव जब मंच पर साकार हुए तो पुष्प वाटिका में रघुनंदन श्रीराम और जनकनंदिनी माता सीता के प्रथम दर्शन ने श्रद्धालुओं के मन को भक्ति और प्रेम से भर दिया। इसके बाद धनुष यज्ञ में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष उठाकर भंग किए जाने के साथ ही पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। सीता स्वयंवर के दिव्य प्रसंग में जब सिया ने रघुवीर के गले में जयमाला डाली तो मानो मिथिलानगरी में मंगल उत्सव छा गया। आधुनिक लाइट और साउंड इफेक्ट, विशाल एलईडी स्क्रीन और भव्य मंच सज्जा ने लीला के दृश्यों को इतना जीवंत कर दिया कि दर्शकों को लगा जैसे वे स्वयं जनकपुर में बैठकर प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह प्रसंग के साक्षी बन रहे हों।

मंचीय लीला का पांचवे दिवस शुभारंभ मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी, केशव धाम, प्रांत संगठन मंत्री राजेश कुमार, वृंदावन के मंत्री सतीश जी और ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी पल्लव सक्सेना ने स्वरूपों को माला अर्पित कर किया।

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी ने महोत्सव को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्री राम के चरित्र को जीवन में उतारना ही सही मायने में राम चरित मानस का मर्म है। उन्होंने बताया कि श्री रामलीला मंचन की शुरुआत सर्वप्रथम स्वयं तुलसीदास जी ने की थी।

“मुनि संग चले रघुवीरा, ताड़का वध से धर्म की जीत”

लीला क्रम में सबसे पहले मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ से प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाते हैं। यज्ञ की रक्षा के लिए दोनों राजकुमारों के साथ मुनि विश्वामित्र वन की ओर प्रस्थान करते हैं। मार्ग में ताड़का का वध कर प्रभु श्रीराम ने अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया।

इसके बाद यज्ञ की पूर्णाहुति और अहिल्या उद्धार का प्रसंग मंचित हुआ। मार्ग में शिला रूप में पड़ी गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को देखकर मुनि विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम ने अपने चरणों की रज प्रदान की। प्रभु के चरण स्पर्श से अहिल्या का उद्धार हुआ। इस प्रसंग ने दर्शकों के मन में प्रभु श्रीराम की करुणा, कृपा और पतित-पावन स्वरूप का भाव जगा दिया।

“नयन मिले तो खिल उठी वाटिका”

इसके बाद जनकपुरी की पुष्प वाटिका का मनोहारी दृश्य सामने आया। माता सीता अपनी सखियों के साथ पुष्प चुनने पहुंचीं, वहीं मुनि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण भी पुष्प वाटिका में पहुंचे। पहली बार जब रघुवीर और जनकनंदिनी की नजरें मिलीं तो वातावरण मानो ठहर गया।

एलईडी स्क्रीन पर सजी जनकपुरी, फूलों से महकती वाटिका, रंग-बिरंगी रोशनी और सखियों की चहक ने त्रेता युग का सजीव संसार रच दिया। श्रीराम के अलौकिक स्वरूप को देखकर माता सीता की दृष्टि उन्हीं पर ठहर गई। सखियों के बीच उन्होंने अपने मन की अभिलाषा प्रकट की।

पुष्प वाटिका के बाद माता जानकी मां अम्बिका के दरबार पहुंचीं। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर उन्होंने अपने मन की इच्छा मां अम्बिका के सामने रखी और प्रभु श्रीराम को वर रूप में पाने की प्रार्थना की। मां अम्बिका ने जनकनंदिनी को आशीर्वाद प्रदान किया। गौरा पूजन का यह प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष भावपूर्ण रहा।

“गुरु को प्रणाम कर रघुवर ने उठाया धनुष, बिजली सा चमका धनुष”

पुष्प वाटिका के बाद मंच पर वह ऐतिहासिक क्षण आया जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। रामलीला मैदान में रविवार को मिथिलानगरी के रूप में सजे भव्य मंच पर धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की लीला का मंचन हुआ।

जनकपुरी में आयोजित सीता स्वयंवर में विभिन्न राज्यों के राजा पहुंचे। मुनि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को साथ लेकर स्वयंवर में पहुंचे। राजा जनक के दरबार में भगवान शिव के विशाल धनुष को देखकर सभी राजा उसे उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं सका।

तभी मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम ने गुरु को प्रणाम किया और बड़ी सहजता से शिव धनुष को उठा लिया। धनुष के उठते ही मंच पर विशेष लाइट और साउंड इफेक्ट से ऐसा दृश्य रचा गया कि दर्शक रोमांचित हो उठे। बिजली की तरह चमकता धनुष अगले ही क्षण इंद्रधनुषी आभा में दिखाई दिया और प्रभु श्रीराम के प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष भंग हो गया।

धनुष भंग की ध्वनि के साथ पूरा रामलीला मैदान “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। विशाल एलईडी स्क्रीन पर राजमहल और धनुष यज्ञ के दृश्य उभरते रहे, जिससे मंचन में अद्भुत सजीवता आ गई। साथ ही वरमाला के समय कोल्ड आतिशबाजी हुई।

“तोड़ो गया धनुष स्वयंवर में…” से गूंज उठा मिथिलाधाम

धनुष भंग होते ही सीता स्वयंवर का प्रसंग शुरू हुआ। मंच पर मंगल गीत गूंज उठा—“तोड़ा गया धनुष स्वयंवर में,
सभी स्तुति करने लगे दशरथ कुमार की…”
इसके बाद जयमाला का मनोहारी दृश्य सामने आया। जनकपुरी में बैठे श्रद्धालु प्रभु श्रीराम और माता जानकी के दिव्य मिलन के साक्षी बने।

बारहद्वारी से निकली सवारियां, मार्ग में हुई पुष्पवर्षा

धनुष यज्ञ और स्वयंवर की लीला से पूर्व लाला चन्नोमल की बारहद्वारी से मुनि विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण घोड़ों पर सवार होकर निकले। माता जानकी अपनी चार सखियों के साथ रथ पर विराजमान थीं।

सवारी रावतपाड़ा, जौहरी बाजार और बिजलीघर होते हुए रामलीला मैदान में बनी जनकपुरी मिथिला नगरी पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी के स्वरूपों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। जगह-जगह जय श्रीराम और जय सियाराम के जयघोष गूंजते रहे।

किन्नर समाज ने उतारी प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती

श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि रामलीला के शुभारंभ पर किन्नर समाज द्वारा प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती उतारी गई। इस परंपरा ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक रंग प्रदान किया। किन्नर चांदनी और प्रीति ने समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रभु श्री राम की आरती उतारी।

लोकपरंपरा में मान्यता है कि वनवास के समय प्रभु श्रीराम ने अयोध्या के स्त्री-पुरुषों को वापस लौटने के लिए कहा था, लेकिन किन्नर समाज वहीं ठहर गया। वनवास पूर्ण होने पर प्रभु श्रीराम की वापसी के समय किन्नर समाज को वहीं पाकर उन्होंने उन्हें आशीर्वाद और वरदान दिया। इसी परंपरा की स्मृति में किन्नर समाज द्वारा प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती की गई। आरती के दौरान पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।

“मेहंदी रचेगी दशरथ भवन में, राम विवाह की तैयारियां शुरू”

रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अपने अनुजों के साथ सोमवार 5 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे राजा दशरथ स्वरूप संजय सिंघल सादाबाद और रानी कौशल्या नीता सिंघल के निमंत्रण पर अग्रवन वाटर वर्क्स में बनी अयोध्या नगरी पहुंचेंगे। यहां भव्य मेहंदी उत्सव का आयोजन होगा।
मेहंदी उत्सव को लेकर राजा दशरथ के परिवार की ओर से विशेष तैयारियां की गई हैं। अयोध्या नगरी में राम विवाह की खुशियों के बीच मेहंदी उत्सव की धूम रहेगी।

ये रहे उपस्थित

लीला के दौरान कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद अग्रवाल, भगवान दास बंसल, मुकेश जौहरी, टीएन अग्रवाल, विनोद जौहरी, मनोज अग्रवाल, अंजुल बंसल, संजय तिवारी, आनंद मंगल, विष्णु दयाल, विजय प्रकाश गोयल, मीडिया प्रभारी राहुल गौतम सहित तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh