आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में मरीजों को बेहतर, तेज और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। विभाग में पीएसीएस (Picture Archiving and Communication System) सेवा का शुभारंभ हो गया। कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गुप्ता ने फीता काटकर इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली का उद्घाटन किया।
पीएसीएस शुरू होने से मरीजों की सीटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे की इमेजिंग को डिजिटल रूप में सहेजना, देखना और साझा करना अब ज्यादा आसान और तेज होगा। चिकित्सकों को मरीज की जांच की तस्वीरों और रिपोर्ट तक जल्दी पहुंच मिलेगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया और असरदार बन सकेगी।
इस मौके पर रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. हरि सिंह, उप प्रधानाचार्य डॉ. टी.पी. सिंह, प्रमुख अधीक्षक डॉ. ब्रजेश शर्मा, डॉ. अंकुर गोयल, डॉ. शैलेंद्र चौधरी, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अखिल प्रताप सिंह, डॉ. निखिल शर्मा, डॉ. करिश्मा गुप्ता, डॉ. अजय श्रीवास्तव और डॉ. वी.पी. पांडेय समेत रेजिडेंट डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे।
सेकंडों में उपलब्ध होंगी डिजिटल इमेजिंग जांचें
पीएसीएस के जरिए सीटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे जैसी अहम रेडियोलॉजी जांचों की इमेज डिजिटल फॉर्मेट में मिलेंगी। इससे पारंपरिक फिल्म बनने और उसके मरीज या डॉक्टर तक पहुंचने में लगने वाला वक्त घटेगा। डॉक्टर डिजिटल स्क्रीन या कंप्यूटर पर मरीज की इमेजिंग आसानी से देख सकेंगे, जिससे जांच के आधार पर इलाज का फैसला लेना तेज और सहज होगा।
इमरजेंसी और आईसीयू मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा
इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ गंभीर और आपातकालीन मरीजों को मिलेगा। आईसीयू, इमरजेंसी और अलग-अलग वार्डों में तैनात डॉक्टर अपने कंप्यूटर या डिजिटल स्क्रीन पर मरीज की रेडियोलॉजी इमेज तुरंत देख सकेंगे। नाजुक हालात में उन्हें जांच की फिल्म का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और मरीज की स्थिति के मुताबिक इलाज जल्द शुरू हो सकेगा। खासकर ट्रॉमा, गंभीर चोट, न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी और अन्य जटिल मामलों में यह प्रणाली चिकित्सकीय निर्णय लेने में मददगार होगी।
पुरानी जांचों का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित
पीएसीएस के जरिए मरीजों की रेडियोलॉजी इमेजिंग और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्थित ढंग से सुरक्षित रखे जा सकेंगे। मरीज के दोबारा अस्पताल आने पर चिकित्सक उसकी पिछली जांचों को देखकर मौजूदा स्थिति से तुलना कर सकेंगे। इससे इलाज में निरंतरता बनी रहेगी और बीमारी के बढ़ने या इलाज के असर को आंकने में भी आसानी होगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से पुरानी फिल्म या रिपोर्ट को भौतिक रूप से ढूंढने की जरूरत भी कम होगी।
फिल्म-लेस व्यवस्था से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
पीएसीएस लागू होने से रेडियोलॉजी विभाग में फिल्म-रहित डिजिटल कामकाज को बढ़ावा मिलेगा। एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य इमेजिंग की फिल्मों पर निर्भरता घटने से संसाधनों की बचत होगी और अस्पताल की सेवाएं ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल बन सकेंगी। डिजिटल माध्यम से इमेज साझा होने पर अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल भी बनेगा।
‘आधुनिक और पारदर्शी चिकित्सा सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध’
प्राचार्य एवं डीन प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज मरीजों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएसीएस की शुरुआत कॉलेज में डिजिटल हेल्थकेयर को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। इस प्रणाली से न सिर्फ मरीजों की जांच और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि अस्पताल के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान भी संभव होगा। इससे चिकित्सकों को इलाज के बारे में समय पर फैसले लेने में मदद मिलेगी।
डॉ. हरि सिंह बोले, डिजिटल हेल्थकेयर की दिशा में क्रांतिकारी कदम
रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. हरि सिंह ने पीएसीएस को डिजिटल हेल्थकेयर की दिशा में एक अहम और क्रांतिकारी कदम बताया। उनके मुताबिक इस प्रणाली से रेडियोडायग्नोसिस विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मरीजों को सटीक, तेज और सुविधाजनक रिपोर्टिंग मिल सकेगी। डिजिटल इमेजिंग की बदौलत चिकित्सकों को मरीज की जांच देखने और उसका चिकित्सकीय मूल्यांकन करने में सहूलियत होगी। साथ ही रेडियोलॉजी विभाग और अस्पताल के अन्य विभागों के बीच तालमेल भी मजबूत होगा।
मरीजों की सुविधा और बेहतर इलाज की ओर अहम कदम
पीएसीएस का शुभारंभ एसएन मेडिकल कॉलेज में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डिजिटल इमेजिंग, सुरक्षित मेडिकल रिकॉर्ड, तेज रिपोर्टिंग और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से अस्पताल का कामकाज ज्यादा असरदार और तकनीक-सक्षम बनेगा। इस अत्याधुनिक प्रणाली के साथ एसएन मेडिकल कॉलेज में डिजिटल, तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल रेडियोलॉजी सेवाओं का नया अध्याय शुरू हुआ है।
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