आगरा। ताजनगरी आगरा में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका अपनाते हुए एक परिवार को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। ग्रीन गैस पाइपलाइन का काम कराने के नाम पर ठगों ने पीड़ित परिवार को फोन कर भरोसे में लिया और मोबाइल पर एक संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करा ली। आरोप है कि फाइल डाउनलोड होते ही शातिर साइबर अपराधियों ने पीड़ित के बैंक खाते का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया और महज कुछ ही पलों में चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 7,99,544 रुपये उड़ा दिए। सबसे दुखद पहलू यह है कि ठगी गई यह रकम पीड़ित के पिता की फिक्सड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी थी, जिसे परिवार ने सुरक्षित भविष्य के लिए जमा किया था। इस मामले में पीड़ित द्वारा साइबर क्राइम थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
ग्रीन गैस पाइपलाइन के काम का दिया गया था झांसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगरा के रहने वाले पीड़ित अमन लालवानी के पास 10 सितंबर को एक फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को संबंधित एजेंसी से बताते हुए ग्रीन गैस पाइपलाइन के काम का झांसा दिया और परिवार को बातों में उलझा लिया। बातचीत के दौरान ही शातिर ठगों ने उनके मोबाइल नंबर पर एक APK फाइल भेजी और उसे तुरंत डाउनलोड करने का निर्देश दिया। परिवार को इस बात का बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था कि यह फाइल उनके लिए जी का जंजाल बन जाएगी। जैसे ही वह संदिग्ध फाइल डाउनलोड हुई, अपराधियों ने पीड़ित के स्मार्टफोन और उससे जुड़े बैंक खातों की गोपनीय जानकारियों तक अपनी पहुंच बना ली।
चार बार में साफ कर दिए 7.99 लाख रुपये
आरोप है कि 15 सितंबर को पीड़ित के ICICI बैंक खाते से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 7,99,544 रुपये निकाल लिए गए। जब बैंक खाते से भारी-भरकम रकम कटने का मैसेज परिवार को मिला, तो उनके होश उड़ गए। बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर पता चला कि साइबर ठगों ने पिता की एफडी से जुड़ी बड़ी रकम पर हाथ साफ कर दिया है।
APK फाइलों के जरिए कैसे सेंध लगा रहे हैं ठग?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में ठग अक्सर किसी सरकारी योजना, यूटिलिटी बिल भुगतान, गैस पाइपलाइन, केवाईसी या तकनीकी अपडेट के नाम पर लोगों को झांसे में लेते हैं और मोबाइल पर APK फाइल भेज देते हैं। जैसे ही यूजर इस फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करता है, मोबाइल का पूरा नियंत्रण (रिमोट एक्सेस) ठगों के हाथ में चला जाता है, जिससे वे आसानी से बैंक ओटीपी और बैंकिंग ऐप्स का दुरुपयोग कर लेते हैं।
साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज, जांच शुरू
घटना से आहत अमन लालवानी ने इस पूरे मामले की शिकायत आगरा के साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने प्राप्त तहरीर के आधार पर अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वर्तमान में पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन के ट्रेल, संदिग्ध मोबाइल नंबरों और भेजी गई APK फाइल के टेक्निकल पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी गई रकम किन-किन राज्यों या बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है।
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