इंटरमीडिएट एजूकेशन एक्ट के खिलाफ काम करते हैं
मनमानी फीस, 2018 के बाद नियुक्ति नहीं कर रहे
कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाने में निरंकुश हो गए
शिक्षा अधिकारियों के पत्रों का उत्तर तक नहीं देते
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Agra, Uttar Pradesh, India. राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार आखिर अल्पसंख्यक विद्यालयों के पीछे क्यों पड़े हैं? यह बड़ा सवाल है। हमने यह सवाल डॉ. देवी सिंह नरवार से ही किया तो उन्होंने बहुत सी बातें बताईं। आइए जानते हैं कि उनका क्या कहना है।
नियमानुसार नियुक्ति नहीं कर रहे
डॉ. नरवार का कहना है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद (यूपी बोर्ड) से संबद्ध अल्पसंख्यक विद्यालयों पर इंटरमीडिएट एजूकेशन एक्ट 1921 लागू होता है। अल्पसंख्यक विद्यालय एक्ट के अनुसार संचालित नहीं हैं। स्वेच्छाचारिता, मनमानी कर रहे हैं। निरंकुश हो गए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ठेंगा दिखाते रहते हैं। पहले ये विद्यालय नियुक्तियों में मनमानी करते थे। 2018 में यूपी सरकार ने अल्पसंख्यक विद्यलयों से सीधी नियुक्ति का अधिकार छीन लिया है। अब उन्हें बाकायदा विज्ञापन प्रकाशित करना होता है। कानपुर की एक संस्था आवेदकों की परीक्षा लेती है। फिर साक्षात्कार होता है। इसके पश्चात नियुक्ति होती है। इस प्रक्रिया के चलते अल्पसंख्यक विद्यालयों के प्रबंधतंत्र के हाथ में कुछ नहीं रह गया है। इस कारण नियुक्ति ही नहीं कर रहे हैं। शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त हैं।
मनमानी फीस वसूल रहे
डॉ. नरवार ने दावा किया कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों में कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों से मनमानी फीस ली जा रही है। अन्य विद्यालयों में कक्षा आठ तक फीस न के बराबर है। अभिभावक नजदीकी विद्यालय में प्रवेश दिलाते हैं और उसी का फायदा ये विद्यालय उठाते हैं। इन विद्यालयों के खिलाफ कोई आवाज उठाता नहीं है, इसलिए मनमानी जारी है। अभिभावकों की जेब पर डाका डाला डा रहा है।
कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाने में मनमर्जी
डॉ. देवी सिंह नरवार ने बताया कि अधिकारियों को लिखित में अवगत करा दिया था कि 31 मार्च, 2023 को जिन अल्पसंख्यक विद्यालयों के प्रधानाचार्य रिटायर हो रहे हैं, वहां कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाने में मनमानी होती है। नियमों को ताक पर रखकर मनमर्जी से किसी को भी कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त कर देते हैं। उनकी यह बात सच साबित हुई। अल्पसंख्यक विद्यालय क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कॉलेज, हरीपर्वत, आगरा में वरिष्ठतम के स्थान पर कनिष्ठ को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बना दिया। इस प्रकरण में संयुक्त निदेशक शिक्षा आरपी शर्मा और जिला विद्यालय निरीक्षक आगरा-2 (बालिका शिक्षा) पत्र भेज चुके हैं। प्रबंधतंत्र की मनमानी नहीं रुकी है।
स्वयं को सरकार मानने लगे हैं
डॉ. देवी सिंह नरवार ने कहा कि यह तो आगरा का मामला है जो प्रकाश में आ गया है। पूरे उत्तर प्रदेश का क्या हाल होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। हाल इतना बुरा है कि अल्पसंख्यक विद्यालय शिक्षा अधिकारियों के पत्रों का उत्तर तक नहीं देते हैं। स्वयं को ही सरकार समझने लगे हैं।
15 व 16 अप्रैल को लखनऊ में होगा विचार-विमर्श
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की बैठक 15 और 16 अप्रैल, 2023 को लखनऊ में होगी। इसमें हर जिले के अल्पसंख्यक विद्यालयों की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने पर विचार चल रहा है। इसके बाद यूपी सरकार से बात करके और कड़े नियम बनवाए जाएंगे। कुल मिलाकर अल्पसंख्यक विद्यालयों की स्वेच्छाचारिता पर रोक लगाई जाएगी। नियमों का पालन करना ही होगा। जिसे मनमानी करनी है, वह सरकारी खजाने से वेतन लेना बंद करे।
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