​सुप्रीम कोर्ट ने ‘शंकराचार्य’ लिखने से कभी नहीं रोका, नोटिस मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दी कानूनी एक्शन की चेतावनी

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लखनऊ। प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़-मरोड़कर उनके खिलाफ नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस को बताया सुप्रीम कोर्ट की अवमानना

इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनके पक्ष से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि प्रशासन की ओर से भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है। उन्होंने दावा किया कि बीती रात 12 बजे के बाद एक अधिकारी शिविर में पहुंचे और नोटिस स्वीकार करने का दबाव बनाया। नोटिस देने वाला व्यक्ति कानूनगो बताया गया है, जिसने नोटिस चस्पा कर दिया और अधिकारी लौट गए।

आधी रात में नोटिस चस्पा करने पर उठाए सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाया कि मेला प्राधिकरण के सामने ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसके चलते आधी रात में नोटिस चस्पा किया गया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का गलत हवाला देकर प्रशासन कब तक बच पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि खुद सरकार ने महाकुंभ के दौरान एक स्मारिका प्रकाशित की थी, जिसमें उन्हें शंकराचार्य के रूप में उल्लेखित किया गया था।

24 घंटे में प्रमाण देने का नोटिस

बताया गया है कि माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर 24 घंटे में यह प्रमाणित करने को कहा है कि वे ही शंकराचार्य हैं। कानूनगो जब शिविर पहुंचे तो शिष्यों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद नोटिस शिविर के गेट पर चस्पा कर दिया गया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी बताया जा रहा है।

दरअसल, ज्योतिष्पीठ में शंकराचार्य की पदवी को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच विवाद है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। इसी आधार पर मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वकील का पक्ष

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि नोटिस में 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जबकि इससे पहले 21 सितंबर 2022 के आदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बताया गया था। उन्होंने कहा कि स्वामीजी का पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को हो चुका था।

वकील के अनुसार, 14 अक्टूबर 2022 के आदेश के बाद 17 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में किसी भी पट्टाभिषेक पर रोक लगाने की बात कही थी, जबकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक इससे पहले ही संपन्न हो चुका था। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी कई स्थानों पर उन्हें शंकराचार्य के रूप में संबोधित किया गया है।

‘शंकराचार्य लिखने पर रोक नहीं’

अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है, शंकराचार्य लिखने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं और उनके गुरु द्वारा नामित रजिस्टर्ड वसीयत के आधार पर वे शंकराचार्य लिख रहे हैं।

लीगल एक्शन की चेतावनी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शंकराचार्य लिखने से नहीं रोका है। नोटिस देने वालों को जवाब दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश कर नोटिस जारी करने पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मौनी अमावस्या के दिन बाल बटुकों के साथ हुई मारपीट के मामले में भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

अखिलेश यादव से फोन पर बातचीत

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फोन कर उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से जुड़े लोग भी उनके पास आए थे। हालांकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी राजनीतिक दल को बुलाया नहीं है और न ही किसी से मदद की अपील की गई है।

स्वामी निश्चलानंद का बयान

पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे न किसी के पक्ष में हैं और न विपक्ष में। साथ ही उन्होंने मेला प्रशासन के निर्णय को “अकाट्य” बताया और कहा कि मीडिया व अन्य लोग इस विवाद को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं।

अशोक गहलोत ने की निंदा, सरकार से माफी की मांग

वहीं, इस प्रकरण ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर पोस्ट कर घटना की निंदा करते हुए कहा कि प्रयागराज जैसी पावन धरा पर माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के साथ पुलिसिया दुर्व्यवहार और उनका अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए संतों के अपमान के लिए तत्काल क्षमा मांगने की मांग की है।

Dr. Bhanu Pratap Singh