फतेहपुर सीकरी: मुगलकालीन वास्तुकला की साक्षी ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी इन दिनों सूफियाना सरूर में डूबी हुई है। हजरत शेख सलीम चिश्ती के 456वें उर्स के पावन अवसर पर ‘फतेहपुर सीकरी महोत्सव’ का आगाज़ एक बेहद भव्य और रूहानी अंदाज़ में हुआ। दरगाह के सज्जादानशीन अदनान फरीदी के सान्निध्य में आयोजित ‘रंग-ए-सूफियाना’ कार्यक्रम ने न केवल अकीदतमंदों को आध्यात्मिक सुकून दिया, बल्कि दुनिया को प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम भी दिया।
सूफी संगीत की सुरमयी शाम: रूह और खुदा का मिलन
कार्यक्रम की शुरुआत रूह को छू लेने वाली सूफी सरगमों से हुई। सुप्रसिद्ध सूफी गायिका नीता पांडे ने अपनी मखमली आवाज़ में जब सूफियाना नज़्में पेश कीं, तो पूरा परिसर भक्ति के रंग में रंग गया। उनके साथ सैयद साहिल आग की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। “साजन हम तुम एक हैं…” जैसे कलामों की गूंज ने श्रोताओं को आत्मा और परमात्मा के मिलन (इश्क-ए-हकीकी) का जीवंत अहसास कराया।
किताब विमोचन: आधुनिक दौर में ‘डिवाइन लव’ की दस्तक
इस खास मौके पर इंग्लैंड से आए भारतीय मूल के लेखक और दार्शनिक शाज खान की बहुचर्चित पुस्तक ‘डिवाइन लव’ (Divine Love) का भव्य विमोचन किया गया। यह पुस्तक सूफी संतों की प्राचीन शिक्षाओं और ईश्वर प्राप्ति के मार्ग को आज के आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।
साझा विरासत का संदेश
चिश्ती फाउंडेशन के संरक्षक अदनान फरीदी ने अपने संबोधन में भारत की महान सूफी और भक्ति परंपरा को याद किया। उन्होंने कहा कि अक्का महादेवी, बाबा फरीद, अमीर खुसरो, गुरु नानक देव, कबीर और मीराबाई जैसे संतों ने मानवता और प्रेम का जो बीज बोया था, उसे आज के दौर में और अधिक सींचने की जरूरत है। कार्यक्रम की संचालिका सदीह अलीम ने कहा कि सूफी संगीत खुदा तक पहुँचने का सबसे सरल और सजीव माध्यम है।
इस रूहानी शाम में ब्लॉक प्रमुख गुड्डू चाहर, परमवीर चाहर, बंटी सिसौदिया, संजय गोयल और बदरुद्दीन कुरैशी सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और जायरीन मौजूद रहे।
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