नई दिल्ली। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत ने अपनी ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता किसी देश विशेष के प्रति झुकाव नहीं, बल्कि अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावसायिक हित
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आपूर्ति के स्रोतों को Diversify (विविध) करने की रणनीति पर काम कर रहा है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि तेल और गैस की खरीद के फैसले केवल व्यावसायिक लाभ और रणनीतिक हितों के आधार पर लिए जाते हैं। भारत अब किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक बाजार के हर उस विकल्प को खुला रख रहा है जो देश को सस्ता और स्थिर ईंधन दे सके।
वेनेजुएला: पुरानी साझेदारी को नई धार
वेनेजुएला को लेकर भारत का रुख काफी सकारात्मक दिखा। मंत्रालय ने याद दिलाया कि वेनेजुएला भारत का पुराना ऊर्जा साझेदार रहा है। साल 2008 से भारतीय सरकारी तेल कंपनियां वहां सक्रिय हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण जो आयात बंद हुआ था, उसे लेकर भारत अब ‘ओपन माइंड’ है। भारत अपनी तेल कंपनियों और वेनेजुएला की नेशनल ऑयल कंपनी PDVSA के बीच साझेदारी को फिर से मजबूती देने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
रूस और बाहरी दबाव
रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत ने दोहराया कि उसके फैसले किसी बाहरी दबाव या प्रतिबंधों की धमकियों से प्रभावित नहीं होते। रूस से तेल लेना भारत की व्यापक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना है।
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