लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मनरेगा योजना का नाम बदले जाने और इसके बजट में कटौती को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की ‘गोपनीय साजिश’ रच रही है।
साजिश के तीन बड़े आरोप
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में मनरेगा को कमजोर करने के लिए भाजपा की कार्यप्रणाली पर तीन मुख्य सवाल उठाए, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ मनरेगा का बजट लगातार कम करती जा रही है। जीएसटी सिस्टम के कारण राज्यों का खजाना पहले से खाली है, ऐसे में केंद्र द्वारा राज्यों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बनाना योजना को बंद करने की दिशा में एक कदम है। अखिलेश ने कहा कि सैकड़ों ग्राम सभाओं को ‘अर्बन कैटेगरी’ (शहरी श्रेणी) में डालकर सरकार ने उनका बजट भी छीन लिया है।
“नाम बदलना महज दिखावा”
सपा अध्यक्ष ने तंज कसते हुए लिखा, “सही मायनों में मनरेगा का नाम बदलना ही नहीं, बल्कि उसका ‘राम-राम’ करना (खत्म करना) ही भाजपा का असली लक्ष्य है। भाजपा अपने सिवा किसी और का पेट भरते हुए नहीं देख सकती।” उन्होंने आगे कहा कि नाम बदलने से जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आएगा, बल्कि यह गरीबों के हक पर डाका डालने जैसा है।
नारा दिया- ‘नहीं चाहिए भाजपा’
अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के प्रति जनता की कथित नाराजगी को शब्दों में पिरोते हुए लिखा “गरीब कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!” उत्तर प्रदेश की राजनीति में मनरेगा एक बड़ा मुद्दा रहा है और अखिलेश के इस हमले ने एक बार फिर केंद्र बनाम राज्य की वित्तीय स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है।
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