ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सावधान रहना होगा…: सीएम योगी

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मेरठ। प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े हालिया विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। बिना किसी का नाम लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में कुछ लोग धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे तत्वों से समाज को सावधान रहने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों को ‘कालनेमि’ बताते हुए कहा कि ये बाहर से धार्मिक नजर आते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता।

“संन्यासी की संपत्ति धर्म और स्वाभिमान राष्ट्र”

सीएम योगी ने कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती। उसकी असली संपत्ति धर्म है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति धर्म के विरुद्ध आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सनातन धर्म, सामाजिक समरसता और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज देश गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हो चुका है और अयोध्या में भव्य रूप से सनातन पताका लहरा रही है। इसे उन्होंने भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।

काशी विश्वनाथ धाम का दिया उदाहरण

काशी विश्वनाथ धाम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब वहां एक साथ दस लोग भी दर्शन नहीं कर पाते थे, जबकि आज प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सनातन संस्कृति के सशक्त होने का परिणाम है।

“भारत का हित सनातन धर्म में निहित”

सीएम योगी ने कहा कि भारत का हित सनातन धर्म में ही निहित है। सनातन धर्म मजबूत होगा तो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा और भारत भी अधिक सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि चाहे धार्मिक नेतृत्व हो या राजनीतिक, जिम्मेदारी ऐसे लोगों को मिलनी चाहिए जो भारत को फिर से उन ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें, जहां वह दो हजार वर्ष पहले था।

नाथ पंथ की परंपरा का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने नाथ पंथ की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह सनातन धर्म की सबसे प्राचीन उपासना विधियों में से एक है, जिसने समाज को जीवन जीने की नई प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक वृहत्तर भारत में नाथ संन्यासियों के चिन्ह देखने को मिलते हैं।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार होते हुए देख रहा है।

Dr. Bhanu Pratap Singh