एविएशन सेक्टर की कंपनियों के लिये भारत तेजी से बढ़ता हुआ एक मार्केट है, जिस पर उनकी लगातार नजरें बनी हुई हैं। आने वाले समय में भारत एविएशन इंडस्ट्री की ग्रोथ में बड़ा खिलाड़ी बनकर उभर सकता है। एविएशन सेक्टर के जानकार मानते हैं कि भारत के इस सेक्टर में ग्रोथ के हिसाब से अगले दो दशक में 2,210 नये विमानों की जरूरत होगी।
भारत के एयर ट्रैफिक में भी अगले दो दशकों को दौरान काफी तेज ग्रोथ होने की उम्मीद है। इससे रोजगार के कई अवसर मिलेंगे और देश को बड़ी संख्या पायलट और टेक्नीशियन की जरूरत पडेगी। एयर ट्रांसपोर्ट का सिस्टम बीते दस सालों में काफी तेज़ी से बदला है। ऑफ़िशियल एयरलाइन गाइड (ओएजी) के मुताबिक अप्रैल 2024 में भारत 1.56 करोड़ सीटों की क्षमता के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एयरलाइन बाज़ार बन गया है जबकि दस साल पहले तक 80 लाख सीटों की क्षमता के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा घरेलू एयरलाइन बाज़ार था।
हाल ही में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कनाडा की एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बॉम्बार्डियर के सीईओ एरिक मार्टेल के साथ मुलाकात की। बॉम्बार्डियर दुनियाभर में अपने ‘चैलेंजर’ और ‘ग्लोबल’ विमानों के साथ इनोवेशन और भरोसेमंद कंपनी के तौर पर अपनी साख बना चुकी है।
गौतम अदाणी ने कहा, “भारत के एविएशन सेक्टर में तेजी को देखते हुए एयरलाइन सर्विस, एमआरओ और डिफेंस सेक्टर में बदलाव लाने वाली साझेदारी पर चर्चा हुई है। हम एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए साथ आए हैं।”
अदाणी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड के पास एविएशन सेक्टर में एक बड़ा पोर्टफोलियो है। मौजूदा समय में कंपनी के पास मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मेंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम जैसे बड़े एयरपोर्ट्स हैं।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक, साल 2030 तक भारत, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हवाई यात्री बाजार बन जाएगा। हालाँकि, भारत में एविएशन सेक्टर को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर ने एयरपोर्ट, एरो ब्रिज, हवाई पट्टियों जैसे एयरोस्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में लगभग 3 बिलियन डॉलर का एफडीआई की बड़ी भूमिका है। उदाहरण के लिए, नवी मुंबई, नोएडा (जेवर) हवाई अड्डे जैसे ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का विकास और बेंगलुरु हवाई अड्डे का विस्तार हो रहा है। लेकिन बड़े हवाई अड्डों के हवाई और ज़मीनी क्षेत्र पर नियंत्रण के कारण ग्रामीण हवाई संपर्क को बढ़ाने की चुनौती रही है।
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