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Lucknow/Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. नोशनल वेतनवृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार अब गंभीर नजर आ रही है। 1 जनवरी 2006 से 1 जनवरी 2016 के बीच अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से 30 जून को सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि का लाभ देने की मांग को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश सक्रिय हो गया है।
डॉ. नरवार ने शिक्षा निदेशक से की मुलाकात
8 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव से लखनऊ स्थित उनके कार्यालय में भेंटकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई।
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने स्पष्ट किया कि नोशनल वेतनवृद्धि के इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा।
30 जून जन्मतिथि की शर्त को किया खारिज
डॉ. नरबार ने बैठक में डी.डी.आर. आगरा के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि जिन शिक्षकों की जन्मतिथि 30 जून है, सिर्फ उन्हीं को यह लाभ मिलेगा। इस पर शिक्षा निदेशक ने इस बात का स्पष्ट खंडन करते हुए कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है और सभी पात्र सेवानिवृत्त शिक्षक इसका लाभ ले सकेंगे।
विधान परिषद सदस्य से भी की मुलाकात
डॉ. नरवार ने विधान परिषद सदस्य डॉ. जयपाल सिंह ‘व्यस्त’ से भी भेंट की और इस मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग रखी। एम.एल.सी. डॉ. जयपाल सिंह ‘व्यस्त‘ ने बताया कि यह प्रकरण विधान परिषद में उठाया जा चुका है और सरकार इस पर जल्द निर्णय लेने जा रही है।
अपर मुख्य सचिव से मिले, दिया ज्ञापन
इसके अलावा डॉ. नरवार ने अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा) श्री दीपक कुमार से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आगरा में माध्यमिक शिक्षा परिषद का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की मांग भी रखी। अपर मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी
नोशनल वेतनवृद्धि प्रकरण वर्षों से लंबित है, जिससे हजारों सेवानिवृत्त शिक्षक एवं प्रधानाचार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार की सक्रियता प्रशंसनीय है।
डॉ. नरवार ने शिक्षक हितों की आवाज को उचित मंचों तक पहुंचाकर एक मिसाल पेश की है। उनकी सकारात्मक पहल और प्रशासनिक स्तर पर की गई प्रभावशाली बातचीत से यह विश्वास जगा है कि सरकार अब इस मुद्दे पर त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेगी।
डॉ. नरवार का यह प्रयास न केवल सेवानिवृत्त शिक्षकों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि शिक्षक समाज की एकजुटता और जागरूकता का परिचायक भी है। उनकी संवेदनशील नेतृत्व क्षमता और संघर्षशील व्यक्तित्व निश्चित ही शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणा है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से डॉ. देवी सिंह नरवार की यह पहल आगामी पीढ़ियों के शिक्षकों के लिए भी एक सशक्त मार्गदर्शन साबित होगी। उनका यह योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
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