आगरा। टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से मिटाने और जन-जन को इसके प्रति सतर्क करने के उद्देश्य से जनपद में सोमवार को ‘एकीकृत निक्षय दिवस’ का व्यापक आयोजन किया गया। जिले के समस्त स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल संभावित मरीजों की पहचान की गई, बल्कि टीबी के लक्षणों और इसके मुफ्त उपचार को लेकर लोगों को व्यापक रूप से जागरूक भी किया गया।
बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग और जांच का दौर
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत आयोजित इस विशेष दिवस पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय रहा। जनपद के कुल 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी), 26 टीबी यूनिट, 44 प्राइमरी हेल्थ इंस्टीट्यूट (पीएचआई) और 30 अर्बन पीएचसी पर यह अभियान चलाया गया।
इस दौरान ओपीडी में आने वाले मरीजों समेत कुल 6843 लोगों की सघन स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग प्रक्रिया में 387 व्यक्ति टीबी के संभावित लक्षण वाले पाए गए। त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी संदिग्धों में से 379 लोगों के बलगम के सैंपल जांच के लिए लिए गए। इसके अलावा, सभी संदिग्ध व्यक्तियों का डिजिटल एक्स-रे भी सुनिश्चित किया गया, ताकि रोग की सही पहचान हो सके।
टीबी का इलाज है संभव और पूरी तरह निःशुल्क
डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट किया कि टीबी का उपचार पूरी तरह संभव है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और दवाइयां पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध हैं। मरीजों को इस बीमारी के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ‘निक्षय पोषण योजना’ चला रही है, जिसके अंतर्गत मरीज के स्वस्थ होने तक उनके बैंक खाते में हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी या बुखार आना, और वजन का तेजी से गिरना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे में किसी को भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए। जांच कराने आई एक संभावित मरीज मुस्कान (बदला हुआ नाम) ने साझा किया कि परिवार में टीबी का मामला होने के कारण उन्होंने एहतियातन अपनी जांच करवाई है, जिससे बीमारी को शुरुआती दौर में ही रोका जा सके।
सीएमओ की जनता से अपील: लक्षण न छिपाएं, जांच कराएं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने जनपदवासियों से भावुक और जागरूक अपील की है। उन्होंने कहा कि टीबी के लक्षणों को छुपाना बीमारी को न्योता देने जैसा है। उन्होंने बताया कि सीने में दर्द, मुंह से खून आना, अत्यधिक थकान, सांस लेने में तकलीफ, रात में पसीना आना, भूख न लगना और गर्दन में गांठ जैसे लक्षण दिखें तो बिना देरी किए सरकारी अस्पताल पहुंचें।
डॉ. श्रीवास्तव ने जोर देकर कहा कि टीबी का इलाज नियमितता पर टिका है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा का कोर्स पूरा करना अनिवार्य है, इसे बीच में बिल्कुल न छोड़ें। उन्होंने कहा, “आपकी जागरूकता और समय पर की गई जांच ही भारत को टीबी मुक्त बनाने की कुंजी है। आइए, लक्षण न छिपाएं और टीबी मुक्त भारत के संकल्प में अपना सहयोग दें।”
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