अख़बारों में बच्चों के लिए जगह कहाँ?—खाली पन्नों पर बचपन की उपेक्षा का सवाल…
प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार रविवार की सुबह बेटे प्रज्ञान को गोद में लेकर अख़बार से कोई रोचक बाल-कहानी पढ़ाने की इच्छा अधूरी रह गई। किसी भी प्रमुख अख़बार में बच्चों के लिए एक भी रचना नहीं थी। समाज बच्चों को पढ़ने के लिए कहता है, पर उन्हें पढ़ने को क्या देता है? […]
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