स्वतंत्रता का अधूरा आलाप… क्या लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव रह गया है?
“आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को […]
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