लखनऊ। देश अपनी अगली जनगणना की ओर बढ़ चुका है और जनगणना 2027 इस बार केवल आबादी की गणना तक सीमित नहीं रहेगी। यह देश के सामाजिक, आर्थिक और जीवनशैली से जुड़े बदलावों की एक व्यापक डिजिटल तस्वीर पेश करेगी। खास बात यह है कि पहली बार नागरिकों से उनके खान–पान की पसंद (फूड चॉइस) से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
भोजन की पसंद से तय होंगी सरकारी योजनाएं
इस जनगणना में प्रत्येक परिवार से यह जानकारी ली जाएगी कि उनके भोजन का मुख्य अनाज क्या है—गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा या मक्का। सरकार इस डेटा के आधार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और पोषण योजनाओं को क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश में युद्धस्तर पर रिहर्सल
उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रयागराज, बुलंदशहर (अनूपशहर) और बहराइच (मिहींपुरवा) में मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल रिहर्सल पूरी की जा चुकी है। गणना के लिए विशेष मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगा।
तीन चरणों में पूरी होगी जनगणना
पहला चरण (20 मई–20 जून): मकानों की सूची तैयार की जाएगी। बिजली, पानी, इंटरनेट, वाहन, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं सहित 32 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसी चरण में परिवार के मुख्य अनाज की जानकारी भी दर्ज होगी।
दूसरा चरण (फरवरी 2027): जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा और व्यक्तिगत विवरण एकत्र किए जाएंगे।
तीसरा चरण (मार्च 2027): ‘रिवीजन फेज’ में जन्म–मृत्यु समेत अन्य अद्यतन जानकारियां जोड़ी जाएंगी।
इन अहम सवालों के जवाब देने होंगे
जनगणना के दौरान नाम, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार का प्रकार, मोबाइल–इंटरनेट की उपलब्धता, वाहन स्वामित्व, पीने के पानी व बिजली का स्रोत, शौचालय–रसोई की सुविधा, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, घर की संरचना, कमरों की संख्या, मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों और विवाहित जोड़ों की संख्या जैसी विस्तृत जानकारी ली जाएगी।
5 लाख से अधिक कर्मचारी संभालेंगे जिम्मेदारी
प्रदेश में इस विशाल अभियान के लिए करीब 5 लाख कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।
प्रगणक: लगभग 4.5 लाख (मुख्यतः शिक्षक), जिन्हें 30 दिन में करीब 150 घरों का डेटा एकत्र करना होगा।
सुपरवाइजर: करीब 75 हजार अधिकारी निगरानी करेंगे।
मानदेय: प्रगणकों को दोनों चरणों के लिए कुल 25 हजार रुपये दिए जाएंगे।
ऑफलाइन मोड में भी होगी एंट्री
तकनीकी दिक्कतों से निपटने के लिए मोबाइल HLO एप में ऑफलाइन मोड की सुविधा दी गई है। नेटवर्क न होने पर भी डेटा दर्ज किया जा सकेगा, जो इंटरनेट मिलते ही स्वतः सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। फिलहाल मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग दिल्ली में चल रही है, जो आगे जिला स्तर पर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
जनगणना 2027 को लेकर यह तैयारियां संकेत देती हैं कि सरकार इस बार आंकड़ों के जरिए देश की बदलती जरूरतों और जीवनशैली को अधिक सटीक रूप से समझने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
साभार सहित
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