Aligarh (Uttar Pradesh, India) । जैन दर्शन किसी प्राणी विशेष के लिए नहीं वरन् सभी के लिए है। विज्ञान और धर्म का गहरा सम्बन्ध है। आज विज्ञानं जिस प्रकार उन्नति कर रहा है। उसमें जैन दर्शन का बड़े स्तर पर सहयोग और समावेश है। उक्त विचार मंगलायतन विश्वविद्यालय के संस्थापक पवन जैन ने अपने व्याख्यान के दौरान व्यक्त किए।
मंविवि के संस्थापक पवन जैन ने शनिवार को महावीर स्वामी दिगंबर जिन मंदिर के दसवें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष में हुए व्याख्यान में ईश्वरी व मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों पर विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा किसी भी द्रव्य के मूल तत्व का कभी नाश नहीं होता। वरन उसकी अवस्था में परिवर्तन होता है। हर वस्तु स्वतंत्र है। इस दुनिया कोई किसी के आधीन नहीं है। संसार के बंध का कारण केवल राग-द्वेष है। इस राग-द्वेष से सभी को ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने मनुष्य की भावना का जिक्र करते हुए कहा कि मनुष्य की पीड़ा यह है कि वह दुःख दूर कर सुख पाना चाहता है। जबकि इन तत्वों का प्रत्येक क्षण परिगमन होता रहता है। अपने वक्तव्य में उन्होंने सर्वज्ञ यानि ईश्वर की व्याख्या की। उन्होंने कहा जैसा कार्य है उसे उसी अवस्था में मान लेना पुरुषार्थ है।

मंविवि के कुलपति प्रो. केवीएसएम कृष्णा ने कहा कि वे पवन जी के सपने को विवि के रूप में जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे है। गुणवत्ता परक शिक्षण संस्थान का निर्माण पवन जैन जी जैसा महान व्यक्तित्व ही कर सकता हैं। उन्होंने कहा कि पवन जी जितने अच्छे वक्ता है उतने ही अच्छे श्रोता भी हैं। कुलपति प्रो. केवीएसएम कृष्णा ने पवन जैन को उनका पोट्रैट भेंट किया।
कुलसचिव ब्रिग समर वीर सिंह ने मंविवि के संस्थापक पवन जैन का अभिवादन किया। उन्होंने बताया कि विवि में चेयर ऑफ़ एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म बना है। इस चेयर के लिए प्रो शिवाजी सरकार को नामित किया गया है।
कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से जुड़े शास्त्री, न्याय, साहित्य रत्न, अध्यात्म तत्वेत्ता, दार्शनिक एवं प्रख्यात विद्वान हुकमचंद भारिल्ल ने कहा कि अपने परिणामों को निर्मल रखो। जब हमारे परिणाम निर्मल होंगे तभी हमारे अंदर धर्म का उजाला होगा। कल्पना बहिन ने षठखंडागमजी के बारे में बताया।
मंगलायतन विश्वविद्यालय स्थित दिगंबर जैन महावीर मंदिर के 10 वर्ष पूरे होने का दो दिवसीय उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। वार्षिकोत्सव को लेकर तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गईं थीं। कार्यक्रम में देश के विभिन्न इलाकों के लोगों ने शिरकत की। शनिवार को शोभायात्रा और झंडारोहण के साथ वार्षिक उत्सव की शुरूआत हुई। इसके बाद महा-मस्तकाअभिषेक एवं श्री महावीर पंचकल्याणक- गर्भ,जन्म,तप, ज्ञान, मोक्ष कल्याणक विधान का आयोजन हुआ। इस बीच विवि परिसर महावीर की वाणी से गुंजायमान रहा। साथ ही कोविड-19 की गाइडलाइंस का पालन किया गया। कार्यक्रम का प्रसारण डिजिटल प्लेटफार्म पर भी किया गया।

शोभायात्रा के दौरान कानपुर से जैन बहादुर जैन परिवार, मुंबई से पंकज भाई दोषी परिवार, मुम्बई से देवेंद्र जैन परिवार, करेली से मुकेश जैन परिवार, अशोक कुमार लुहाड़िया,सुधीर जी शास्त्री,
तीर्थधाम मंगलायतन परिवार एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित थे। संचालन डॉ विवेक जैन, पंडित ऋषभ शास्त्री, सचिन जैन, शभावना जैन, छिंदवाड़ा स्वाध्याय प्रेमी ग्रुप द्वारा किया गया। झंडारोहण मंविवि के कुलपति प्रो. केवीएसएम कृष्णा एवं कुलसचिव ब्रिग. समरवीर सिंह आदि गणमान्य व्यक्तियों द्वारा किया गया।
इसके पश्चात श्री महावीर पंचकल्याणक विधान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विधि विधान के माड़ने पर मंगल कलश पवन जैन परिवार, ऋषभ जैन परिवार, बीना बैन परिवार, प्रो. जयंतीलाल जैन परिवार एवं अनेक महिलाओं द्वारा मंगल कलश की स्थापना की गई। कार्यक्रम में आसपास के जिलों के लोगों ने भागीदारी की।

संचालन सुधीर शास्त्री ने किया। कार्यक्रम संरक्षक मंविवि के चेयरमैन हेमंत गोयल, निर्देशन कुलपति प्रो. केवीएसएम कृष्णा व प्रो. जयंतीलाल जैन व संयोजन कुलसचिव ब्रिग. समरवीर सिंह का रहा। आयोजन में डॉ. अजय राजपूत, मंविवि के प्रशासनिक अधिकारी गोपाल राजपूत, डॉ. सिद्धार्थ जैन, आशीष जैन, मयंक जैन, रोहित शाक्य, विकास वर्मा, जितेंद्र शर्मा आदि का सहयोग रहा। इस दौरान आशा जैन, स्वप्निल जैन, प्रिया जैन, आर्जव जैन,आर्णव जैन, प्रो शिवाजी सरकार, डॉ दिनेश शर्मा, डॉ. दिनेश पांडेय, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. अनुराग शाक्य, डॉ. अंकुर अग्रवाल, डॉ. हैदर अली, डॉ.पूनम रानी, डॉ. दीपशिखा सक्सेना, मनीषा उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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