पाकिस्तान चीन को धोखा दे सकता है। आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय अलगाव के साथ ही चीन पर लगातार बढ़ रही निर्भरता के बीच पाकिस्तान की इमरान सरकार चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर CPEC को खत्म करने के लिए तैयार है।
एशिया टाइम्स ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने CPEC को रद्द करने की पेशकश की है। हालांकि वह ऐसा तभी करेगा जब अमेरिका से उसे ऐसी ही मदद मिले।
दरअसल, पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहा है इसीलिए प्रधानमंत्री इमरान खान ने मोईद यूसुफ को पाक नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर यानी NSA नियुक्त किया है।
एशिया टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है कि अगर पाकिस्तान को वाशिंगटन से इसी तरह की वित्तीय सहायता मिलती है तो वह चीन के साथ CPEC को खत्म कर देगा।
पहले भी हुई है इस तरह की कोशिश
इस तरह की कोशिशें पहले भी हुई हैं। जुलाई 2019 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बेलआउट पैकेज के अलावा बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ। अमेरिका के साथ पाकिस्तान की बेहतर संबंध बनाने की संभावनाएं तब और कम हो गईं जब अमेरिका ने नवंबर 2021 में कतर को अफगानिस्तान में अपना राजनयिक प्रतिनिधि घोषित किया था।
CPEC को कर्ज का जाल बताने वाली खबरों को किया था खारिज
फरवरी की शुरुआत में इमरान खान ने चीन इंस्टीट्यूट ऑफ फुडन यूनिवर्सिटी की सलाहकार समिति के निदेशक एरिक ली के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि “हम CPEC और ग्वादर को भू-अर्थशास्त्र के लिए एक महान अवसर के रूप में देखते हैं।” साथ ही पाकिस्तान ने सीपीईसी के ‘कर्ज के जाल’ होने की खबरों को खारिज किया था।
ग्वादर में होता है CPEC का विरोध, दो सालों से बंद है प्रोजेक्ट
करीब दो साल से CPEC पर काम बंद होने से चीन काफी नाराज है, क्योंकि वो इस प्रोजेक्ट पर करीब 16 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। इमरान सरकार चीन को मनाकर इसे शुरू कराना चाहती है, लेकिन काम शुरू होता इसके पहले ही विरोध शुरू हो रहा है। बलूचिस्तान के ग्वादर में कई दिनों से पॉलिटिकल पार्टीज, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स, मछुआरे समेत कई अन्य तबकों के लोग CPEC के विरोध में सरकार विरोधी रैलियों में शामिल हो रहे हैं।
यहां के लोगों की मांग है कि CPEC पर कोई भी काम शुरू करने से पहले बुनियादी सुविधाएं दी जाएं। इनमें गैरजरूरी चेक पॉइंट्स हटाना, पीने का पानी और बिजली मुहैया कराना, मछली पकड़ने के बड़े ट्रॉलर हटाना और ईरान बॉर्डर खोलना शामिल है।
-एजेंसियां
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