पीएम नरेंद्र मोदी ने आज असम के जोरहाट में अहोम सेनापति लचित बोरफुकन की 125 फुट ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलर’ (बहादुरी की प्रतिमा) का उद्घाटन किया।
लचित बोरफुकन ने कई बार मुगलों के साथ युद्ध करके उन्हें हराया। लचित बोरफुकन को नॉर्थ ईस्ट का शिवाजी कहा जाता है। लचित बोरफुकन ने मुगलों से युद्ध के बाद उनके कब्जे से गुवाहाटी को छुड़ाया। गुवाहाटी को फिर से हासिल करने के लिए मुगलों ने अहोम साम्राज्य के खिलाफ सराईघाट की लड़ाई लड़ी थी। अहोम के युद्ध में मुगल सेना ने 1000 से अधिक तोपों के अलावा कई उस समय के बड़े हथियारों को यूज किया लेकिन वह लचित बोरफुकन के साथ हार गए।
बीमारी से हुआ लचित का निधन
लाचित बरफूकन असमिया आहोम साम्राज्य के सेनापति हुआ करते थे। सन 1671 में लड़ी गई सराईघाट की लड़ाई में उन्होंने असमिया सेना का नेतृत्व किया। सेना में लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने मुगलों को हरा दिया लेकिन इस जीत के एक साल बाद उनका बीमारी से निधन हो गया। लचित बोरफुकन के नाम पर नैशनल डिफेंस अकेडमी (एनडीए) में बेस्ट कैडेट गोल्ड मेडल भी दिया जाता है। इस सम्मान को लचित मेडल भी कहा जाता है।
लचित नाम था, बनाए गए बरफुकन
लचित सेंग कालुक मो-साई (एक ताई-अहोम पुजारी) के चौथे पुत्र थे। उनका जन्म सेंग-लॉन्ग मोंग चराइडो में ताई अहोम के परिवार में हुआ था। उनका धर्म फुरेलुंग अहोम था। उनका नाम लचित था और उन्होंने बरफुकन की पदवी मिली थी। दरअसल 1665 में लचित को अहोम सेना का सेनाध्यक्ष बनाया गया था। इस पद को बरफुकन कहा जाता था। इसलिए वह लचित बरफुकन के नाम से फेमस हुए।
सोने की मूठ वाली तलवार से लड़े
लचित बोरफुकन को अहोम स्वर्गदेव के ध्वज वाहक (सोलधर बरुआ) का पद दिया गया था। यह पद किसी कूटनीतिज्ञ या राजनेता के लिए सबसे महत्वपद माना जाता था। राजा चक्रध्वज ने मुगलों के विरुद्ध खड़ी की सेना का लचित को लीडर बनाया। राजा ने लचित को सोने की मूठ वाली तलवार भेंट में दी गई।
तस्वीर नहीं, पर विवरण खूब उपलब्ध
लचित की कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं है लेकिन वर्णन के अनुसार उनकी तस्वीरें सामने आई हैं और उसी के अनुसार उनकी प्रतिमा बनाई गई है। कहा जाता है कि लचित बोरफुकन का मुख चौड़ा था। उनके चेहरे पर इतना तेज था कि कोई भी उन्हें आंख उठाकर देखने से पहले डरता था।
भुला दिया गया इतिहास
कुछ दो-चार किताबों को छोड़ दें तो भारतीय इतिहास में इस महान योद्धा लचित बोरफुकन का खास जिक्र नहीं मिलता है। राष्ट्रीय डिफेंस अकेडमी ने लचित की प्रतिमा स्थापित कराई, उनके नाम पर मेडल शुरू किया। उनकी याद में हर साल नवंबर महीने में असम लचित दिवस भी मनाता है। अब बीजेपी सरकार ने उनकी विशाल प्रतिमा का अनावरण करके आने वाली पीढ़ी को भूला दिए गए इतिहास को याद दिलाने का प्रयास किया है।
-एजेंसी
- ’चलो गाँव की ओर’: लायंस क्लब और आगरा डायबिटीज फोरम ने बलदेव में लगाया मेगा हेल्थ कैंप, 500 मरीजों को मिली राहत - February 22, 2026
- Agra News: वीआईपी रोड पर ट्रैफिक नियमों के उड़े परखच्चे, सनरूफ खोलकर स्टंट करते दिखे युवा, एक्शन की तैयारी - February 22, 2026
- सलाम! विदाई के बाद ससुराल नहीं, सीधे ‘इंटरव्यू’ देने पहुंची दुल्हन; दूल्हे की समझदारी ने पेश की महिला सशक्तिकरण की मिसाल - February 22, 2026