नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई पुलिस बर्बरता के वीडियो के साथ की। राहुल गांधी ने सरकार से सीधा सवाल किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने भविष्य के लिए सवाल पूछ रहे छात्रों के साथ इतनी क्रूरता क्यों की गई?
’एजुकेशन सिस्टम धांधली का शिकार’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कभी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ माना जाने वाला भारतीय शिक्षा तंत्र आज पूरी तरह से ‘धांधली’ में तब्दील हो चुका है। उन्होंने डेटा साझा करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश में 152 पेपर लीक हो चुके हैं, और यह आंकड़ा असल में इससे भी अधिक हो सकता है। राहुल ने बताया कि देश के 7.5 करोड़ छात्र इस अव्यवस्था से सीधे प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा, “भारत सरकार का कुल शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि भारतीय परिवार केवल NEET परीक्षा पर ही 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं।”
उन्होंने गरीब परिवारों के छात्रों के सपनों को बर्बाद करने वाले माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई न होने पर सरकार को घेरा।
राहुल गांधी की सरकार के समक्ष तीन मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं, जिसे पूरा करना उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी बताया:
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
जवाबदेही तय हो: प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरतापूर्ण हमला करने वाले हर जिम्मेदार व्यक्ति को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री से माफी: प्रधानमंत्री को इस पूरी अव्यवस्था और छात्रों के अपमान के लिए देश के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी छात्रों की इन मांगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता, वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
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